रीप से मिली नई राह : अणीमठ की रश्मि देवी ने रसोई से रेस्टोरेंट तक लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी
संजय कुंवर
जोशीमठ। पहाड़ की महिलाओं के जीवन में संघर्ष कोई नई बात नहीं है। घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ सीमित संसाधनों में जीवनयापन करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा है। लेकिन जब मेहनत को सही दिशा और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिलता है, तो यही महिलाएं सफलता की नई इबारत लिखती हैं। चमोली जिले के अणीमठ गांव की रश्मि देवी इसकी सशक्त मिसाल हैं।

कभी अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को लेकर चिंतित रहने वाली रश्मि देवी आज अपने रेस्टोरेंट व्यवसाय से हर माह 25 से 30 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। उनकी यह उपलब्धि केवल आर्थिक सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण महिला उद्यमिता की प्रेरक कहानी भी है।
रश्मि देवी सिद्धनाथ स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं और जय मां गढ़ी भवानी ग्राम संगठन, पर्णखंडेश्वरी क्लस्टर से जुड़ी हैं। वर्ष 2025 में राज्य सरकार की रीप (रूरल एंटरप्राइज एक्सेलेरेशन प्रोजेक्ट) के तहत उन्हें रेस्टोरेंट व्यवसाय स्थापित करने के लिए 75 हजार रुपये की वित्तीय सहायता मिली। इस सहयोग ने उनके वर्षों पुराने सपने को हकीकत में बदलने का रास्ता खोल दिया।
शुरुआत आसान नहीं थी। सीमित पूंजी, नए व्यवसाय की चुनौतियां और ग्राहकों का भरोसा जीतने की जिम्मेदारी उनके सामने थी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। साफ-सफाई, स्वाद और बेहतर व्यवहार को अपनी पहचान बनाया। धीरे-धीरे उनका छोटा-सा रेस्टोरेंट स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों की भी पसंद बनने लगा।

आज रश्मि देवी का व्यवसाय न केवल उनके परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुका है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, घरेलू जरूरतों और भविष्य की योजनाओं को भी मजबूती दे रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि उनकी सफलता ने गांव की अन्य महिलाओं में भी स्वरोजगार को लेकर नया विश्वास जगाया है।
रश्मि देवी कहती हैं कि यदि रीप परियोजना का सहयोग नहीं मिला होता, तो शायद उनका सपना कभी साकार नहीं हो पाता। उनका मानना है कि महिलाएं यदि अवसर का सही उपयोग करें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें, तो आत्मनिर्भरता केवल एक नारा नहीं, बल्कि वास्तविकता बन सकती है।
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने की दिशा में ऐसे प्रयास महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। रश्मि देवी की कहानी यह संदेश देती है कि सरकारी योजनाएं तभी सफल होती हैं, जब लाभार्थी उन्हें मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के साथ अपने जीवन में उतारते हैं।
