चमोली : 15,225 फीट पर आस्था का अद्भुत धाम, श्री लोकपाल लक्ष्मण मंदिर में उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब

Team PahadRaftar

हेमकुंड साहिब के समीप स्थित विश्व के सबसे ऊंचे पौराणिक लक्ष्मण मंदिर में ब्रह्मकमल की महक और हिमालयी सौंदर्य बना आकर्षण

रिपोर्ट : संजय कुंवर | हेमकुंड साहिब/चमोली

उत्तराखंड के चमोली जनपद की उच्च हिमालयी लोकपाल घाटी में स्थित पौराणिक श्री लोकपाल लक्ष्मण मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। समुद्रतल से लगभग 15,225 फीट की ऊंचाई पर दंडी पुष्कर्णी सरोवर के तट पर स्थित भगवान श्री लक्ष्मण का यह पवित्र धाम दुनिया के सबसे ऊंचे पौराणिक लक्ष्मण मंदिरों में शुमार है। हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे के समीप स्थित इस धाम में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं।

इन दिनों मंदिर परिसर के आसपास उत्तराखंड के राज्य पुष्प ब्रह्मकमल सहित दुर्लभ हिमालयी पुष्प अपनी अनुपम छटा बिखेर रहे हैं। बर्फ से आच्छादित चोटियों के बीच खिले इन दिव्य पुष्पों की सुगंध और प्राकृतिक सौंदर्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति के साथ प्रकृति के अद्भुत वैभव का भी साक्षात्कार करा रहा है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी पावन स्थल पर शेषनाग ने कठोर तपस्या की थी। वहीं, भगवान श्री लक्ष्मण ने मेघनाद वध के बाद शक्ति प्राप्ति के लिए यहीं ध्यान किया था। इसी कारण लोकपाल धाम सनातन धर्मावलंबियों की गहरी आस्था का केंद्र माना जाता है।

इस वर्ष 22 मई को वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। आगामी चार माह तक देशभर से आने वाले श्रद्धालु भगवान श्री लोकपाल लक्ष्मण के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे।

श्री लोकपाल लक्ष्मण मंदिर समिति, पुलना-भ्यूंडार मंदिर की व्यवस्थाओं का संचालन कर रही है। समिति की ओर से नियुक्त पुजारी प्रतिदिन प्रातःकालीन अभिषेक, पूजा, भोग और सायंकालीन आरती संपन्न कराते हैं।

मंदिर समिति के अध्यक्ष डी.एस. चौहान ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु लोकपाल धाम पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से गोविंदघाट-घांघरिया मार्ग से लोकपाल धाम पहुंचकर भगवान श्री लोकपाल लक्ष्मण के दर्शन करने और इस दिव्य हिमालयी तीर्थ की अलौकिक अनुभूति प्राप्त करने की अपील की।

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