चमोली : फूलों की घाटी में समय से पहले खिला हिमालयन ब्लू पॉपी, प्रकृति प्रेमियों में बढ़ा उत्साह

Team PahadRaftar

संजय कुंवर जोशीमठ (चमोली)। विश्व धरोहर फूलों की घाटी में अल्पाइन हिमालयी पुष्पों की रानी कही जाने वाली हिमालयन ब्लू पॉपी ने अपनी रंगत बिखेरनी शुरू कर दी है। इस बार घाटी में यह दुर्लभ पुष्प सामान्य समय से पहले खिल गया है, जिससे प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों में खासा उत्साह है। नीले रंग की आभा से सजा यह फूल घाटी की प्राकृतिक सुंदरता में चार चांद लगा रहा है।

भ्यूंडार घाटी में स्थित फूलों की घाटी देश-दुनिया के प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। इन दिनों घाटी में ब्लू पॉपी के अलावा पोटेंटिला, एनीमोना, प्रिमूला, मार्श मैरीगोल्ड, फॉरगेट मी नॉट, जिरेनियम, लिलियम और एस्टर समेत 50 से अधिक प्रजातियों के रंग-बिरंगे फूल खिलने लगे हैं। घाटी के प्रवेश द्वार से लेकर रिवर व्यू प्वाइंट तक फूलों की बहार नजर आ रही है।

माउंटेन गाइड जयदीप भट्ट ने बताया कि इस वर्ष जून के तीसरे सप्ताह में ही हिमालयन ब्लू पॉपी खिल चुकी है, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए सुखद संकेत है। आने वाले दिनों में घाटी में फूलों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।

फूलों की घाटी की रेंज अधिकारी चेतना कांडपाल के अनुसार इस वर्ष सीजन के शुरुआती तीन सप्ताह में पर्यटकों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर रही है। ब्लू पॉपी के खिलने से घाटी की सुंदरता और निखर गई है तथा पर्यटक इसका दीदार करने के लिए उत्साहित हैं।

जापानी पर्यटकों की पहली पसंद

हिमालयन ब्लू पॉपी, जिसका वानस्पतिक नाम मेकोनोप्सिस बेटोनिसिफोलिया है, अल्पाइन हिमालयी क्षेत्रों के सबसे आकर्षक फूलों में गिनी जाती है। जापान, थाईलैंड और सिंगापुर से आने वाले पर्यटक विशेष रूप से इस फूल को देखने के लिए फूलों की घाटी पहुंचते हैं। इसकी नीली रंगत और दुर्लभता इसे अन्य पुष्पों से अलग पहचान देती है।

दिलचस्प है घाटी में ब्लू पॉपी के पहुंचने की कहानी

जानकारों के अनुसार वर्ष 1986 तक फूलों की घाटी में ब्लू पॉपी नहीं पाई जाती थी। बताया जाता है कि जापान के शोध छात्र चो बकांबे अध्ययन के दौरान इसके बीज यहां लाए थे। कुछ वर्षों बाद घाटी में ब्लू पॉपी की क्यारियां दिखाई देने लगीं और तब से यह फूल घाटी का स्थायी हिस्सा बन गया।

500 से अधिक प्रजातियों के फूलों का घर

करीब 12,500 फीट की ऊंचाई पर 87.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली फूलों की घाटी जैव विविधता का अनमोल खजाना है। यहां 500 से अधिक प्रजातियों के फूल, दुर्लभ जड़ी-बूटियां, वन्यजीव और पक्षी पाए जाते हैं। वर्ष 1982 में इसे राष्ट्रीय उद्यान और 2005 में यूनेस्को द्वारा विश्व प्राकृतिक धरोहर घोषित किया गया था।

प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि ब्लू पॉपी के खिलने के साथ ही अब फूलों की घाटी अपने पूरे शबाब की ओर बढ़ रही है। जुलाई और अगस्त में यहां रंग-बिरंगे फूलों का अद्भुत संसार पर्यटकों को आकर्षित करेगा।

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