देहरादून। उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैण बनाने की मांग को लेकर रविवार को स्थायी राजधानी गैरसैण समिति के बैनर तले विधानसभा परिसर के बाहर जोरदार आक्रोश पदयात्रा निकाली गई। तपती धूप के बीच निकाली गई इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं, पूर्व सैन्य अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। आंदोलनकारियों ने सरकार से गैरसैण को स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग करते हुए जोरदार नारेबाजी की।

पदयात्रा के दौरान उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब प्रशासन और पुलिस ने मंत्रियों एवं वीआईपी आवासों वाली डिफेंस कॉलोनी के रास्ते से यात्रा निकालने पर आपत्ति जताई। आंदोलनकारियों ने इसका विरोध किया और कुछ देर तक गतिरोध की स्थिति बनी रही। बाद में कॉलोनी प्रबंधन से बातचीत के बाद यात्रा को आगे बढ़ने की अनुमति दी गई।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पूर्व आईएएस अधिकारी विनोद प्रसाद रतुड़ी ने कहा कि गैरसैण केवल राजधानी का मुद्दा नहीं, बल्कि उत्तराखंड के स्वाभिमान और संतुलित विकास का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी स्थायी राजधानी का सपना अधूरा है, जो पहाड़ के लोगों के साथ अन्याय है।
युवा आंदोलनकारी पार्थ रतुड़ी ने कहा कि पहाड़ आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है, जबकि सत्ता और संसाधनों का अधिकांश हिस्सा मैदानी क्षेत्रों तक सीमित है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों ने गैरसैण के मुद्दे को केवल चुनावी वादों तक सीमित रखा है।
डीएवी पीजी कॉलेज के पूर्व महासचिव सचिन थपलियाल ने कहा कि गैरसैण उत्तराखंड की भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र है तथा इसे स्थायी राजधानी बनाया जाना राज्य हित में आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं और पहाड़ के विकास के लिए गैरसैण को राजधानी बनाए जाने की मांग लगातार उठती रही है।
पदयात्रा में पूर्व आईएएस एस.एस. पांकती, ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल, कैप्टन राकेश ध्यानी, प्रकाश थपलियाल, लक्ष्मी प्रसाद रतुड़ी, जगदीश ममगाईं, राजेन्द्र प्रसाद कण्डवाल, रमेश थपलियाल, आनंद राम, सुधीर गैरोला, मनमोहन शर्मा, अवधेश शर्मा, सत्य प्रकाश कोठियाल सहित अनेक गणमान्य लोग शामिल रहे।
समिति ने चेतावनी दी कि यदि गैरसैण को स्थायी राजधानी बनाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा तथा देहरादून से गैरसैण तक बड़े जनआंदोलन की शुरुआत की जाएगी।

