जोशीमठ, संवाददाता। केदारघाटी की बेटी और युवा उद्यमी को रिवर्स माइग्रेशन, स्वरोजगार और पहाड़ों में रोजगार सृजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए गौरा देवी सम्मान से सम्मानित किया गया। मिलेट वैली उर्गमघाटी में आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान त्रियुगीनारायण को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने तथा युवाओं को गांवों में रोजगार के लिए प्रेरित करने के लिए प्रदान किया गया।

रंजना रावत नेगी वर्तमान में पलायन आयोग की सदस्य हैं। उन्होंने वर्षों पहले जिस त्रियुगीनारायण को वेडिंग डेस्टिनेशन बनाने का सपना देखा था, वह आज साकार हो चुका है। रुद्रप्रयाग जिले स्थित आज देश के प्रमुख वेडिंग डेस्टिनेशन में शुमार हो गया है। यहां प्रतिवर्ष सैकड़ों विवाह संपन्न हो रहे हैं, जिससे स्थानीय युवाओं, होटल व्यवसायियों, पुजारियों, वाहन संचालकों और अन्य लोगों को रोजगार मिल रहा है।
नौकरी छोड़ गांव लौटकर शुरू की स्वरोजगार की मुहिम
फार्मेसी में डिग्री हासिल करने के बाद रंजना ने एक मल्टीनेशनल कंपनी में प्रोडक्शन मैनेजर के रूप में कार्य किया, लेकिन पहाड़ के लिए कुछ करने की चाह उन्हें वापस गांव ले आई। करीब 15 वर्ष पहले उन्होंने गांव लौटकर मशरूम, सब्जी, फूल, कीवी और अमेरिकन केसर की खेती शुरू की। उनके प्रयासों ने न केवल उन्हें सफलता दिलाई बल्कि अनेक ग्रामीणों को भी स्वरोजगार की राह दिखाई।

रंजना ने राज्य के विभिन्न गांवों में जाकर लोगों को प्रशिक्षण दिया। वह अब तक 50 हजार से अधिक लोगों को स्वरोजगार का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उनकी संस्था गढ़माटी के माध्यम से दो हजार से अधिक महिलाओं को मशरूम उत्पादन से जोड़ा गया है। महिलाओं के लिए उत्पादन इकाइयों की स्थापना कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का भी कार्य किया गया है।
पलायन के खिलाफ बनीं मिसाल
रंजना रावत का नाम आज उत्तराखंड में रिवर्स माइग्रेशन की सफल मिसाल के रूप में लिया जाता है। वह लगातार युवाओं को गांवों में रहकर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनके कार्यों को देखते हुए उन्हें कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सम्मान मिल चुके हैं। वह की सदस्य होने के साथ-साथ विभिन्न सरकारी समितियों में भी अपनी सेवाएं दे रही हैं।
मायके से ससुराल तक बंजर भूमि को बनाया उपजाऊ
अपने पैतृक गांव भीरी में स्वरोजगार का मॉडल विकसित करने के बाद रंजना ने ससुराल क्षेत्र धनपुर पट्टी के पाबौ गांव में भी बंजर पड़ी भूमि को पुनर्जीवित करने का अभियान शुरू किया। ग्रामीणों की सहभागिता से वर्षों से अनुपयोगी पड़ी भूमि को खेती योग्य बनाकर रोजगार और आजीविका से जोड़ा गया है।
गौरा देवी सम्मान मिलने पर रंजना ने कहा कि यह सम्मान उन सभी महिलाओं और युवाओं का है, जो पहाड़ में रहकर रोजगार सृजन और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं और सामूहिक प्रयासों से पलायन की चुनौती का समाधान निकाला जा सकता है।
