
केदार घाटी में बारिश-बर्फबारी से बढ़ीं मुश्किलें, जनजीवन प्रभावित
तापमान में गिरावट से ठिठुरे लोग, खेती-पशुपालन और यात्रा तैयारियों पर असर
लक्ष्मण नेगी
ऊखीमठ। केदार घाटी में लगातार हो रही बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी से जनजीवन प्रभावित हो गया है। तापमान में अचानक आई गिरावट से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, बच्चों, काश्तकारों और पशुपालकों को उठानी पड़ रही है।
बारिश के कारण क्षेत्र में ठंड बढ़ गई है। लोगों को फिर से गर्म कपड़े और अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है। सीमांत क्षेत्रों में हालात ज्यादा चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। वहां तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे सामान्य जनजीवन पर असर पड़ा है।
बेमौसमी बारिश का असर खेती-किसानी पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अप्रैल के पहले सप्ताह में आमतौर पर काश्तकार धान की असिंचित बुवाई शुरू कर देते हैं, लेकिन इस बार लगातार हो रही बारिश से खेती का काम प्रभावित हो गया है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
मदमहेश्वर घाटी के गैंड बष्टी निवासी प्रगतिशील काश्तकार बलबीर राणा ने बताया कि इस समय तक धान की बुवाई शुरू हो जाती थी, लेकिन मौसम की बेरुखी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। लगातार बारिश के कारण खेतों में काम करना मुश्किल हो रहा है।
पशुपालकों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है। बारिश और ठंड के चलते पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था और देखभाल मुश्किल हो गई है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान गिरने से चारापत्ती का संकट भी गहराने लगा है।
बुरूवा गांव के भेड़पालक वीरेन्द्र धिरवाण ने बताया कि चैत्र माह में फुलारी घोंघा विसर्जन के बाद भेड़पालक बुग्यालों की ओर निकल जाते हैं, लेकिन इस बार लगातार बारिश और ठंड के कारण बुग्यालों की ओर बढ़ना मुश्किल हो गया है।
उधर, केदारनाथ धाम में लगातार हो रही बर्फबारी का असर आगामी 22 अप्रैल से शुरू होने वाली केदारनाथ यात्रा की तैयारियों पर भी पड़ रहा है। यात्रा व्यवस्थाओं को सुचारू करने में दिक्कतें आ रही हैं। वहीं गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर यात्रा सीजन में दुकानें लगाने वाले व्यापारियों की चिंता भी बढ़ गई है।
लगातार खराब मौसम ने केदार घाटी में लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। यदि मौसम का मिजाज जल्द नहीं बदला तो आने वाले दिनों में खेती, पशुपालन और यात्रा व्यवस्थाओं पर इसका असर और अधिक गहरा सकता है।
“अप्रैल के पहले सप्ताह तक धान की बुवाई शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार लगातार बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है।”
– बलबीर राणा, प्रगतिशील काश्तकार
“हर साल इस समय तक हम बुग्यालों की ओर बढ़ जाते हैं, लेकिन इस बार मौसम ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं।”
– वीरेन्द्र धिरवाण, भेड़पालक
