
गेहूं, जौ और सरसों की कटाई अटकी, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में धान बुवाई भी प्रभावित
केएस असवाल
गौचर: पहाड़ों में अप्रैल का महीना कास्तकारी के लिहाज से सबसे अहम माना जाता है, लेकिन इस बार बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर संकट खड़ा कर दिया है। पकने की कगार पर पहुंच चुकी फसलों को लेकर कास्तकारों की चिंता बढ़ गई है। किसानों को डर सता रहा है कि यदि मौसम ने जल्द साथ नहीं दिया तो खेतों में खड़ी फसल को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अप्रैल में पहाड़ी क्षेत्रों में खेती-किसानी का काम तेजी पकड़ लेता है। ऊंचाई वाले इलाकों में धान की बुवाई शुरू हो जाती है, जबकि निचले क्षेत्रों में गेहूं, जौ और सरसों की कटाई का समय होता है। लेकिन इस बार लगातार रुक-रुक कर हो रही बारिश ने खेती के काम पर ब्रेक लगा दिया है।
कास्तकारों का कहना है कि जाड़ों में पर्याप्त बारिश न होने के कारण गेहूं की फसल समय से पहले पकने की स्थिति में पहुंच गई थी, ऐसे में अप्रैल की धूप फसल के लिए बेहद जरूरी थी। लेकिन मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। एक ओर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में धान की बुवाई प्रभावित हुई है, तो दूसरी ओर निचले इलाकों में किसान सरसों, जौ और गेहूं की कटाई शुरू भी नहीं कर पा रहे हैं।
लगातार बारिश से कास्तकारों की बेचैनी बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो पक चुकी फसल खेतों में ही खराब हो सकती है।
उधर, बारिश के चलते ठंड ने भी फिर वापसी कर ली है, जिससे लोगों ने दोबारा गर्म कपड़े निकाल लिए हैं। हालांकि इस बारिश से वन विभाग और पेयजल विभाग को राहत मिली है। जंगलों में सुलग रही आग पर काफी हद तक काबू पाया गया है, वहीं पेयजल संकट से भी कुछ राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

