ऊखीमठ : क्रौंच पर्वत की गोद में बसा उसनतोली बुग्याल, प्रकृति-आस्था और पर्यटन संभावनाओं का अनमोल संगम

Team PahadRaftar

लक्ष्मण नेगी

ऊखीमठ। उत्तराखंड की हिमालयी वादियों में स्थित उसनतोली बुग्याल अपनी अनुपम प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक आस्था, जैव विविधता और पर्यटन की अपार संभावनाओं के कारण तेजी से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। क्रौंच पर्वत की तलहटी में और द्रोणगिरी नदी के उद्गम स्थल के समीप स्थित यह बुग्याल प्रकृति प्रेमियों, श्रद्धालुओं और साहसिक पर्यटन के शौकीनों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

विशाल हरे-भरे घास के मैदान, रंग-बिरंगे पुष्पों की चादर, शीतल हवाएं और हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों का विहंगम दृश्य उसनतोली बुग्याल को विशेष बनाता है। यहां का शांत वातावरण और मनमोहक दृश्यावली हर आगंतुक को अपनी ओर आकर्षित करती है।

द्रोणगिरी नदी का उद्गम, आस्था का भी केंद्र

इस क्षेत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहीं से पवित्र द्रोणगिरी नदी का उद्गम माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस नदी का जल औषधीय गुणों से भरपूर है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। लोक मान्यता है कि इसके जल से स्नान करने पर रोगों से मुक्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व

उसनतोली बुग्याल का संबंध प्राचीन धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं से भी जुड़ा है। क्रौंच पर्वत का उल्लेख पुराणों और लोककथाओं में तप और साधना की भूमि के रूप में मिलता है। मान्यता है कि यहां साधु-संतों ने वर्षों तक तपस्या की। यही कारण है कि यह क्षेत्र आज भी श्रद्धालुओं और साधकों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है।

दुर्लभ जड़ी-बूटियों और वन्य जीवन का बसेरा

यह बुग्याल दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटियों और वनस्पतियों का समृद्ध भंडार है। आयुर्वेदिक दृष्टि से यहां पाई जाने वाली वनस्पतियां अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इसके अलावा यह क्षेत्र विभिन्न वन्यजीवों और पक्षियों का भी प्राकृतिक आवास है। पर्यावरणीय दृष्टि से यह क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील और संरक्षण योग्य माना जाता है।

पर्यटन विकास से खुल सकते हैं रोजगार के रास्ते

कार्तिकेय मंदिर समिति अध्यक्ष बिक्रम सिंह नेगी ने बताया कि उसनतोली बुग्याल में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं। यहां ट्रैकिंग, कैंपिंग, प्रकृति अवलोकन, फोटोग्राफी और एडवेंचर गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है। यदि योजनाबद्ध तरीके से इसका विकास किया जाए, तो यह उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।

वहीं पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य अर्जुन सिंह नेगी ने कहा कि यदि यहां पर्यटन गतिविधियों का विकास होता है तो स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। होमस्टे, गाइड सेवा, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पलायन जैसी समस्या पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा।

विकास के साथ संरक्षण भी जरूरी

हालांकि इस क्षेत्र में विकास की असीम संभावनाएं हैं, लेकिन इसके साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अनियंत्रित पर्यटन और अव्यवस्थित निर्माण से इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए आवश्यक है कि विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखा जाए।

सतत विकास की मांग

जिला पंचायत सदस्य कण्डारा अजयवीर भण्डारी ने कहा कि सरकार और स्थानीय प्रशासन को मिलकर इस क्षेत्र के सतत विकास के लिए ठोस योजना बनानी चाहिए। इको-टूरिज्म को बढ़ावा देते हुए स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि विकास के साथ प्राकृतिक संतुलन भी बना रहे।

पर्यावरणविद चन्द्र सिंह नेगी का कहना है कि उसनतोली बुग्याल केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति, आस्था और संस्कृति का अद्वितीय संगम है। वहीं अनिल जिरवाण ने कहा कि यदि इस प्राकृतिक धरोहर को सहेजते हुए संतुलित विकास किया जाए, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और आकर्षण का केंद्र बना रहेगा।

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