ज्योतिर्मठ : पटुड़ी गांव में जीतू बगड़वाल देव नृत्य की धूम, लोकआस्था और संस्कृति का दिखा अद्भुत संगम

Team PahadRaftar

गढ़वाल की पौराणिक लोककथा पर आधारित पारंपरिक देव नृत्य, नौ दिन और नौ रात तक चलता है आयोजन

 संजय कुंवर

ज्योतिर्मठ : अलकनंदा घाटी के पटुड़ी गांव में इन दिनों पौराणिक जीतू बगड़वाल देव नृत्य की धूम मची हुई है। नौ दिन और नौ रात तक चलने वाले इस पारंपरिक आयोजन में लोकआस्था, धार्मिक परंपरा और गढ़वाली संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। खराब मौसम और रुक-रुक कर हो रही बारिश के बावजूद इस देवनृत्य को देखने के लिए लामबगड़, खीरो, पांडुकेश्वर सहित आसपास के गांवों और ज्योतिर्मठ क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पटुड़ी पहुंच रहे हैं।

यह पौराणिक आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, बल्कि गढ़वाल की लोकगाथाओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करने वाला मंच भी बना हुआ है। नृत्य के माध्यम से जीतू बगड़वाल की पौराणिक कथा का मंचन किया जा रहा है। इसमें दिखाया जाता है कि किस तरह जीतू बगड़वाल ने गोरख्या जाति के लोगों का कर्ज चुकाया। लोककथा के इस प्रसंग को पारंपरिक शैली में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसे देखने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

धान रोपाई की परंपरा भी बनी आकर्षण का केंद्र

इस आयोजन की खास बात यह भी है कि इसमें गढ़वाल की कृषि संस्कृति को भी शामिल किया गया है। कार्यक्रम के दौरान धान की रोपाई की पारंपरिक झलक भी दिखाई जा रही है। इसके तहत जीतू बगड़वाल और अन्य देवी-देवताओं के पश्वा रोपाई करते हैं। यह परंपरा पहाड़ के ग्रामीण जीवन, कृषि और देव आस्था के गहरे संबंध को दर्शाती है।

गोरख्या नृत्य ने भी बांधा समां

बगड़वाल नृत्य के साथ-साथ इस दौरान गोरख्या नृत्य का आयोजन भी किया गया, जिसने आयोजन में अलग ही रंग भर दिया। पारंपरिक वेशभूषा, लोकवाद्य और देवभाव से परिपूर्ण प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को देर तक बांधे रखा।

महिलाएं संभाल रहीं आतिथ्य की जिम्मेदारी

गांव में चल रहे इस धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन में महिला मंगल दल और गांव की मातृशक्ति भी अहम भूमिका निभा रही है। बाहर से पहुंच रहे श्रद्धालुओं के आतिथ्य, सत्कार और जलपान की जिम्मेदारी महिलाएं पूरी निष्ठा के साथ संभाल रही हैं। आयोजन में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी बढ़-चढ़कर भागीदारी कर रही हैं।

नई पीढ़ी को परंपरा से जोड़ रहा आयोजन

लामबगड़ ग्राम सभा की प्रधान मीना चौहान ने बताया कि पटुड़ी गांव में आयोजित यह पौराणिक जीतू बगड़वाल नृत्य ग्रामीणों द्वारा हर वर्ष हर्षोल्लास के साथ संपन्न कराया जाता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी लोकसंस्कृति, देव परंपरा और पौराणिक विरासत से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।

क्या है जीतू बगड़वाल नृत्य

  • गढ़वाल की पौराणिक लोककथा पर आधारित पारंपरिक देव नृत्य
  • नौ दिन और नौ रात तक चलता है आयोजन
  • इसमें देव आस्था, लोकनाट्य और कृषि संस्कृति का संगम दिखता है
  • गोरख्या नृत्य और धान रोपाई भी इसका हिस्सा हैं।

 

“यह आयोजन हमारी लोकआस्था, देव परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। ग्रामीण इसे पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आयोजित कर रहे हैं।”
         –  मीना चौहान, ग्राम प्रधान

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