पीपलकोटी : रिंगाल शिल्प से खुलेंगे रोजगार के नए द्वार, पीपलकोटी में 24 प्रशिक्षणार्थियों ने सीखे आधुनिक डिजाइन

Team PahadRaftar

पीपलकोटी : पहाड़ की पारंपरिक हस्तशिल्प कला रिंगाल अब स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बनकर उभर रही है। चमोली जिले के पीपलकोटी स्थित रिंगाल एवं काष्ठ शिल्प ग्रोथ सेंटर में जिला उद्योग केंद्र चमोली के सहयोग से संचालित एक माह का विशेष रिंगाल प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हो गया। प्रशिक्षण के दौरान 24 शिल्पियों को बाजार की मांग के अनुरूप आधुनिक डिज़ाइन और उपयोगी उत्पाद तैयार करने की तकनीक सिखाई गई।

प्रशिक्षण शिविर अनुसूचित जाति उपयोजना (एससीपी) के अंतर्गत आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों को रिंगाल और बांस से घरेलू उपयोग तथा सजावटी सामान तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। शिल्पियों ने पारंपरिक कला को आधुनिक स्वरूप में ढालने की बारीकियां सीखीं, जिससे उनके उत्पादों को बेहतर बाजार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

आत्मनिर्भरता की मजबूत राह बनेगा रिंगाल

समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचीं नगर पंचायत पीपलकोटी अध्यक्ष आरती नवानी ने प्रशिक्षणार्थियों द्वारा तैयार उत्पादों की सराहना की। उन्होंने कहा कि रिंगाल जैसे स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग और आधुनिक प्रशिक्षण ही आत्मनिर्भर उत्तराखंड की नींव को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को गांव में ही रोजगार से जोड़ने का काम कर रहे हैं।

मार्केटिंग और बिक्री में मिलेगा सहयोग

जिला उद्योग केंद्र चमोली की महाप्रबंधक अंजलि रमन ने कहा कि विभाग की ओर से तैयार उत्पादों की मार्केटिंग और बिक्री के लिए हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि शिल्पी गुणवत्ता, फिनिशिंग और डिज़ाइन पर ध्यान देंगे तो उनके उत्पाद बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।

तकनीक और गुणवत्ता से बढ़ेगी पहचान

उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद के जिला समन्वयक आशीष प्रसाद ने कहा कि पारंपरिक रिंगाल उत्पादों को आधुनिक रूप देकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बदलते बाजार के अनुरूप शिल्पियों को तकनीक, गुणवत्ता और प्रस्तुति पर लगातार काम करना होगा।

इन विशेषज्ञों ने दी ट्रेनिंग

प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्रोथ सेंटर का संचालन करने वाली हिमालय स्वायत्त सहकारिता के अध्यक्ष एवं रिंगाल प्रशिक्षक रमेश लाल, सदस्य एवं मुखौटा निर्माण विशेषज्ञ धर्म लाल, तथा उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद के मास्टर ट्रेनर एवं सहकारिता के कोषाध्यक्ष प्रदीप कुमार ने प्रशिक्षण दिया।

ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं और महिलाओं ने लिया हिस्सा

कार्यक्रम में बेडूमाथल, किरुली और नौरख पीपलकोटी क्षेत्र के प्रशिक्षणार्थियों ने भागीदारी की। समापन अवसर पर नौरख वार्ड नंबर-1 की पार्षद पूजा देवी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

आयोजकों और प्रशासन का मानना है कि रिंगाल उद्योग में आ रहे आधुनिक बदलाव से न केवल पलायन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं और महिलाओं को गांव में ही सम्मानजनक स्वरोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

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