
सनातन धर्म को प्राचीन परम्परा का प्रतीक पवित्र छड़ी यात्रा पहुंची ज्योतिर्मठ, मठ में छड़ी पूजन के साथ हुआ साधु संतों का स्वागत सत्कार
संजय कुंवर, ज्योर्तिमठ
आदि गुरु शंकराचार्य की परंपरा में ज्योतिर्मठ ज्योतिषपीठ पहुंची जूना अखाड़ा की छड़ी यात्रा, भक्ति और आस्था के संगम में डूबा नगर, पवित्र छड़ी यात्रा का ज्योतिर्मठ में हुआ भव्य स्वागत। ज्योर्तिमठ में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्य और ज्योतिर्मठ के व्यवस्थापक ब्रह्मचारी विष्णु प्रिया नन्द महाराज ने छड़ी यात्रा के साथ आए सभी साधु संत महात्माओं का स्वागत अभिनन्दन किया और इस पवित्र छड़ी को पकड़ कर ज्योर्तिमठ के सभी देव स्थलों में दर्शन पूजन किया। सभी संत जन आदि ने ज्योतिर्मठ परिसर में ही रात्रि विश्राम किया।
बता दें यह पवित्र छड़ी यात्रा कल बदरीनाथ धाम के लिए रवाना होगी। दरअसल हरिद्वार से उत्तराखंड के चार धामों के लिए चल रही ये पवित्र सनातनी आस्था का प्रतीक छड़ी यात्रा रविवार को ज्योतिर्मठ पहुंची। इस दौरान ज्योतिर्मठ के गांधी मैदान में यात्रा का भव्य स्वागत किया गया।
इस शोभा यात्रा के जरिए सनातन की रक्षा के लिए एकजुट होने का संदेश भी दिया गया। हरिद्वार से साधु-संतों द्वारा लाई जा रही यह पवित्र छड़ी यात्रा ज्योतिर्मठ मुख्यालय में पहुंच गई है छड़ी के साथ चल रहे लोगों ने सनातन की रक्षा का संदेश दिया। यह यात्रा उत्तराखंड के चारों धामों में जाने के बाद आखिरी में आदि कैलाश जाएगी जहां यात्रा का समापन होगा। ज्योर्तिमठ के व्यवस्थापक ब्रह्मचारी विष्णु प्रिया नन्द महाराज ने बताया कि इस सनातनी यात्रा का उद्देश्य सनातनी संस्कृति बचाने के साथ ही जहां सरकार नहीं पहुंच पा रही है वहां जाकर लोगों की दिक्कतें, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि परेशानियों को जानते हुए उन्हें मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक पहुंचना भी है।
हर साल की तरह इस बार भी श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा की पवित्र छड़ी यात्रा रविवार को ज्योर्तिमठ पहुंची, जहां इस यात्रा का स्वागत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के अद्भुत संगम के साथ हुआ। यात्रा के ज्योर्तिमठ नगर में प्रवेश करते ही, पूरा वातावरण “हर हर महादेव” और “जय श्री शंकराचार्य” के जयघोष से गूंज उठा।
आपको बता दें कि यह ऐतिहासिक यात्रा आदि गुरु शंकराचार्य की दिग्विजय यात्रा की स्मृति में निकाली जाती है। वहीं यात्रा जिसके माध्यम से उन्होंने पूरे भारतवर्ष में भ्रमण कर सनातन धर्म की पुनर्स्थापना की थी। यह यात्रा देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और सनातन परंपरा की जीवंत मिसाल है। यह छड़ी यात्रा कुल 32 दिनों की है जो उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, चंपावत और पिथौरागढ़ जैसे जिलों से होकर 22 अक्टूबर को आदि कैलाश ओम पर्वत पहुंचेगी।
