
सेमलडाल मैदान को लेकर संघर्ष : आज गडोरा वासियों ने दिया धरना-प्रदर्शन
पहाड़ रफ्तार
पीपलकोटी : नगर पंचायत पीपलकोटी के सेमलडाल मैदान में पिटकुल द्वारा किए जा रहे कार्यालय निर्माण कार्य से नगरवासियों के साथ ही क्षेत्र वासियों में आक्रोश बना हुआ है। बंड विकास संगठन के नेतृत्व में क्षेत्र वासियों ने पिटकुल का कार्य रोककर आंदोलन शुरू कर दिया है। आज गडोरा वासियों ने दिया धरना-प्रदर्शन।

सेमलडाल मैदान क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों के युवाओं व छात्रों का एक मात्र खेल मैदान है। जहां पर वर्षभर विभिन्न खेल गतिविधियों के साथ विद्यालयों के खेल प्रतियोगिता आयोजित होती रही हैं। साथ ही हर वर्ष बंड विकास औद्योगिक, पर्यटन एवं सांस्कृतिक मेले का भी भव्य आयोजन किया जाता है। आपातकालीन स्थिति में हेलीकॉप्टर लैंडिंग, चारधाम यात्रा के दौरान वाहनों की पार्किंग भी यहां होती रही है। ऐसे में सेमलडाल मैदान क्षेत्र के विकास के लिए अहम रहा है। 29 मई से मैदान को लेकर बंड विकास संगठन के साथ क्षेत्रीय जनता ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। अब तक नौरख पीपलकोटी, अगथला, रैतोली, कम्यार और आज गडोरा वासियों द्वारा धरना-प्रदर्शन किया गया। बंड संगठन के अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह नेगी और पूर्व अध्यक्ष अतुल शाह ने बताया कि खेल मैदान को लेकर क्षेत्रीय जनता का धरना-प्रदर्शन जारी है। उन्होंने कहा कि कल एसडीएम चमोली द्वारा पिटकुल, एनएच एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक बुलाई गई है। जिसमें सेमलडाल मैदान को लेकर वार्ता होगी।
सेमलडाला मैदान पर एक नजर
क्षेत्रीय जनता द्वारा सेमडाला की 154 नाली भूमि विष्णु प्रयाग को दी गई थी, जिसे बाद में सिंचाई विभाग को ट्रांसफर कर दी गई। इसके बाद जेपी को ट्रांसफर की गई। जेपी कंपनी के बाद इस भूमि को उर्जा निगम को और अब पिटकुल को हस्तांतरित की गई थी। वर्ष 2009 -10 में पिटकुल यहां सब स्टेशन बनाने जा रही थी, तब क्षेत्रीय जनता के आंदोलन के बाद पिटकुल को हाट में सब स्टेशन के लिए जगह दी गई। क्षेत्रीय जनता का संघर्ष रंग लाया और वर्ष 2011-12 में 74 नाली जमीन खेल मैदान को दी गई। इसके बाद पिटकुल द्वारा वर्ष 2024 में हाईवे के नीचे की 20 नाली जमीन स्वामी विवेकानंद होस्पिल के लिए दान कर दी गई है। जहां पर स्वामी विवेकानंद परमार्थ चिकित्सालय का निर्माण कार्य चल रहा है। वहीं अब सेमलडाल मैदान से सटे 50 नाली भूमि पर पिटकुल द्वारा अपना चीफ कार्यालय निर्माण शुरू किया गया है। जिसकी भनक लगते ही क्षेत्रवासियों ने काम रोक कर आंदोलन शुरू कर दिया है। अब देखना है कि मैदान के लिए यह जंग आगे कब तक चलती है ?

