ऊखीमठ लक्ष्मण नेगी
मद्महेश्वर घाटी के युवा ब्लॉगर एवं समाजसेवी आलोक राणा ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायी पहल करते हुए ऊखीमठ-मनसूना-रासी मोटर मार्ग पर जुकांणी स्थित प्राकृतिक जल स्रोत के संरक्षण और संवर्धन का जिम्मा अपने हाथों में लिया है। उनकी इस पहल की क्षेत्रभर में सराहना हो रही है। जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने इसे जल संरक्षण की दिशा में अनुकरणीय कदम बताया है।

जानकारी के अनुसार पिलोजी-गिरीया निर्माणाधीन मोटर मार्ग के निर्माण के दौरान जुकांणी का प्राकृतिक जल स्रोत क्षतिग्रस्त हो गया था। इससे वर्षों से ग्रामीणों और राहगीरों की प्यास बुझाने वाली यह धारा प्रभावित हो गई थी। लंबे समय से इसके संरक्षण और पुनर्जीवन की मांग उठ रही थी।
इसी बीच गिरीया निवासी आलोक राणा ने व्यक्तिगत प्रयास और अपने बाहरी फॉलोअर्स के सहयोग से जल स्रोत को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया। उन्होंने स्रोत के आसपास जमा मलबा हटाने, प्राकृतिक जल प्रवाह को व्यवस्थित करने तथा संरक्षण संबंधी कार्य शुरू कर दिए हैं। उनका उद्देश्य केवल जल स्रोत को पुनर्जीवित करना ही नहीं, बल्कि लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है।
आलोक राणा ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों के प्राकृतिक जल स्रोत हमारी अमूल्य धरोहर हैं। इन्हीं स्रोतों से गांवों की पेयजल व्यवस्था और स्थानीय पारिस्थितिकी संतुलित रहती है। विकास कार्यों के साथ इन स्रोतों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। यदि समय रहते सामूहिक प्रयास नहीं किए गए तो भविष्य में जल संकट और गहरा सकता है।
ज्येष्ठ प्रमुख राकेश नेगी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य विनोद राणा, प्रधान संगठन के ब्लॉक महामंत्री मदन भट्ट, ग्राम प्रधान सरिता नेगी, उनियाणा की बिशाम्बरी देवी, पूर्व प्रधान प्रताप सिंह राणा, बीना थपलियाल, प्रेमलता पंत तथा व्यापार संघ मनसूना के अध्यक्ष अवतार सिंह राणा समेत अनेक लोगों ने आलोक राणा की पहल की सराहना की। उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभागों से सड़क निर्माण कार्यों के दौरान प्राकृतिक जल स्रोतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा क्षतिग्रस्त स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग भी उठाई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मद्महेश्वर घाटी में जल स्रोत संरक्षण की यह पहल अब जनसहभागिता का रूप ले रही है। उनका विश्वास है कि सामूहिक सहयोग से जुकांणी का प्राकृतिक जल स्रोत फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौट आया है और आगे भी राहगीरों व ग्रामीणों के लिए जीवनदायिनी धारा बना रहेगा।
