
राकेश्वरी मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, शंखध्वनि और जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर
ऊखीमठ। मदमहेश्वर घाटी के रांसी गांव स्थित भगवती राकेश्वरी मंदिर में दो माह से चल रहे पौराणिक देव जागरों का शुक्रवार को ब्रह्म कमल अर्पित करने के साथ समापन हो गया। बुग्यालों से लाए गए ब्रह्म कमल मां राकेश्वरी को अर्पित कर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने क्षेत्र की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।

समापन पर सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। पंडित रोशन देवशाली और ईश्वरी प्रसाद भट्ट ने पंचांग पूजन कर 33 कोटि देवी-देवताओं के साथ मां राकेश्वरी और भगवान मदमहेश्वर का आह्वान किया। पूजा-अर्चना और आरती के बाद दोपहर में प्रमुख जागर गायक पूर्ण सिंह पंवार के नेतृत्व में ग्रामीणों ने पारंपरिक जागर गायन किया। जागरों में भगवान श्रीकृष्ण और पांडवों की महिमा का गुणगान हुआ।
शंखध्वनि से हुआ ब्रह्म कमल का स्वागत
दोपहर करीब 2:10 बजे बुग्यालों से ब्रह्म कमल लेकर पहुंचे गजपाल खोयाल और कुंवर खोयाल को शंखध्वनि के साथ मंदिर परिसर में आमंत्रित किया गया। ब्रह्म कमल मंदिर में पहुंचते ही मां राकेश्वरी के जयकारों से परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से मां को ब्रह्म कमल अर्पित किए।

राज्यमंत्री चंडी प्रसाद भट्ट ने कहा कि राकेश्वरी मंदिर में होने वाले देव जागर क्षेत्र की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं।
राकेश्वरी मंदिर समिति के कार्यकारी अध्यक्ष मदन भट्ट ने बताया कि श्रावण मास की संक्रांति से देव जागरों का शुभारंभ होता है। दो गते आश्विन को ब्रह्म कमल अर्पित करने के साथ इनका समापन होता है। इस दौरान प्रतिदिन शाम सात से आठ बजे तक जागरों के माध्यम से देवी-देवताओं का आह्वान और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का गुणगान किया जाता है।
पूर्व समिति अध्यक्ष जगत सिंह पंवार ने बताया कि मां को अर्पित होने वाला ब्रह्म कमल करीब 14 हजार फीट की ऊंचाई वाले बुग्यालों से लाया जाता है। इसे लाने में सदियों पुरानी परंपराओं का पालन किया जाता है।
समिति सचिव दलीप सिंह रावत ने कहा कि रांसी, उनियाणा सहित मदमहेश्वर घाटी के ग्रामीण इस परंपरा को पीढ़ियों से आगे बढ़ा रहे हैं। कार्यक्रम में सोनिया पंवार, कार्तिक सिंह खोयाल समेत मंदिर समिति के पदाधिकारी और विभिन्न गांवों से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
