पीपलकोटी : पहाड़ की बेटी श्रेया ने छुआ गगन, अब दून मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर बनने की राह

Team PahadRaftar

बंड क्षेत्र की बेटी का एमबीबीएस में चयन, गांव में खुशी की लहर; PM श्री जीजीआईसी ज्योतिर्मठ की प्रधानाचार्य उर्मिला बहुगुणा ने दी स्नेहिल शुभकामनाएं

संजय कुंवर पीपलकोटी। पहाड़ की बेटियां जब अपने सपनों को पंख देती हैं तो उनकी उड़ान केवल परिवार की खुशियों तक सीमित नहीं रहती। उनकी सफलता पूरे गांव, समाज और क्षेत्र के लिए उम्मीद और गर्व की कहानी बन जाती है। चमोली के बंड क्षेत्र की ग्राम सभा सल्ला–रैतौली निवासी कु. श्रेया मिश्रा की सफलता भी ऐसी ही कहानी है। श्रेया का चयन एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए दून मेडिकल कॉलेज, देहरादून में हुआ है।

श्रेया के चयन की खबर सामने आते ही मिश्रा परिवार में खुशी का माहौल बन गया। परिवार की इस उपलब्धि की खबर जैसे-जैसे क्षेत्र में पहुंची, बंड क्षेत्र के लोगों ने भी इसे अपनी बेटी की सफलता मानते हुए शुभकामनाएं दीं। ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने श्रेया के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

मेहनत और लगन से हासिल किया मुकाम

ग्रामीण परिवेश से निकलकर चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखना श्रेया की मेहनत, लगन और प्रतिभा का परिणाम है। एमबीबीएस में चयन के साथ ही अब उसके सामने डॉक्टर बनने का एक बड़ा सपना साकार करने की लंबी राह खुल गई है।

श्रेया वरिष्ठ जानकी प्रसाद मिश्रा की पोती तथा उत्तराखंड उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश महामंत्री प्रकाश मिश्रा के छोटे भाई सुभाष मिश्रा की सुपुत्री हैं। उनकी इस उपलब्धि पर परिवार के साथ ही रिश्तेदारों और क्षेत्रवासियों में खासा उत्साह है।

प्रधानाचार्य उर्मिला बहुगुणा ने दी स्नेहिल शुभकामनाएं

पीएम श्री आदर्श राजकीय बालिका इंटर कॉलेज ज्योतिर्मठ की प्रधानाचार्य श्रीमती उर्मिला बहुगुणा ने भी श्रेया की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उसे स्नेहिल शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने पैंनखंडा क्षेत्र की ओर से श्रेया और उसके परिवार को बधाई देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

प्रधानाचार्य उर्मिला बहुगुणा के अनुसार श्रेया उनके रिश्ते में भतीजी भी हैं। यही वजह है कि श्रेया की सफलता उनके लिए व्यक्तिगत और पारिवारिक खुशी का भी अवसर है। उन्होंने डिजिटल और सोशल मीडिया के माध्यम से भी श्रेया तथा उसके परिजनों तक अपनी शुभकामनाएं पहुंचाई हैं।

सिर्फ परिवार नहीं, पूरे बंड क्षेत्र की खुशी

श्रेया की उपलब्धि को क्षेत्रवासी महज एक छात्रा के एमबीबीएस में चयन के रूप में नहीं देख रहे हैं। यह उस पहाड़ की बेटी की कहानी है, जिसने सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश के बीच अपने सपने को लक्ष्य बनाया और उसे हासिल करने की दिशा में पहला बड़ा कदम बढ़ाया।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि श्रेया की सफलता बंड क्षेत्र के दूसरे बच्चों, खासकर बेटियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी। यह संदेश भी सामने आया है कि यदि बेटियों को शिक्षा और अवसर मिलें तो वे किसी भी क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं।

पहाड़ के लिए डॉक्टर बनने का सपना

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की चुनौतियां आज भी बड़ी चिंता का विषय हैं। दूरस्थ गांवों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और इलाज के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में किसी पहाड़ी गांव की बेटी का डॉक्टर बनने की राह पर आगे बढ़ना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पहाड़ की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी उम्मीद भी है।

श्रेया के सामने अब एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने की चुनौती है। परिवार और क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि वह अपनी मेहनत और संवेदनशीलता के साथ एक कुशल चिकित्सक के रूप में पहचान बनाएंगी।

मां नंदा और बंड भूमियाल से उज्ज्वल भविष्य की कामना

श्रेया की सफलता पर परिवार और क्षेत्रवासियों ने मां नंदा देवी और बंड भूमियाल से उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। लोगों की उम्मीद है कि चिकित्सा शिक्षा पूरी करने के बाद श्रेया न केवल एक सफल डॉक्टर बनेंगी, बल्कि अपने पहाड़ और समाज के प्रति सेवाभाव को भी अपनी पहचान बनाएंगी।

बंड क्षेत्र आज अपनी इस बेटी की उपलब्धि पर गर्व कर रहा है। सल्ला–रैतौली की पगडंडियों से दून मेडिकल कॉलेज तक पहुंची श्रेया की यह उड़ान उन तमाम पहाड़ी बेटियों के लिए संदेश है कि सपने भले ही ऊंचे हों, लेकिन मेहनत और हौसले के आगे पहाड़ भी छोटे पड़ जाते हैं।

Leave a Reply

You May Like