
केएस असवाल ऊखीमठ। सावन माह में आयोजित होने वाली भेड़ पालक समुदाय की आराध्य देवी भगवती मनणामाई की पांच दिवसीय, 32 किलोमीटर लंबी लोकजात यात्रा का बुधवार को रासी गांव स्थित राकेश्वरी मंदिर से वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच शुभारंभ हुआ। यात्रा में रासी गांव, मद्महेश्वर घाटी और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिला-पुरुष, युवा और भेड़ पालक समुदाय के लोग शामिल हुए। पूरे क्षेत्र में मां मनणामाई के जयघोष और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज से भक्तिमय वातावरण बना रहा।
सुबह राकेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना, हवन और देवी अनुष्ठान के बाद भगवती मनणामाई की डोली को श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों और जयकारों के बीच यात्रा के लिए रवाना किया। श्रद्धालुओं ने क्षेत्र की सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा, पशुधन की रक्षा और जनकल्याण की कामना करते हुए मां का आशीर्वाद लिया।
पांच दिनों तक चलने वाली यह लोकजात यात्रा करीब 32 किलोमीटर की दुर्गम पर्वतीय पैदल यात्रा तय कर भगवती मनणामाई के पावन तपस्थल पहुंचेगी। यात्रा के दौरान विभिन्न पारंपरिक पड़ावों पर विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।
मान्यता है कि भगवती मनणामाई की कृपा से पशुधन सुरक्षित रहता है, प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा होती है और क्षेत्र में सुख-शांति व समृद्धि बनी रहती है। इसी आस्था के चलते प्रत्येक वर्ष सावन माह में आयोजित इस लोकजात यात्रा में दूर-दराज के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
शिक्षाविद रविन्द्र भट्ट ने कहा कि मनणामाई लोकजात यात्रा क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। यह यात्रा केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, लोक संस्कृति और पारंपरिक परंपराओं के संरक्षण का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।
बदरी-केदार मंदिर समिति के पूर्व सदस्य शिव सिंह रावत ने बताया कि यात्रा के शुभारंभ पर रासी गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा। ब्रह्ममुहूर्त से ही मां मनणामाई के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना रहा।
