
ऊखीमठ से केदारनाथ के लिए रवाना हुई भगवान केदारनाथ की पंचमुखी डोली, गूंजे जयकारे
22 अप्रैल को खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट
लक्ष्मण नेगी
ऊखीमठ। पर्वतराज हिमालय की गोद में स्थित विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तैयारियों के बीच रविवार को भगवान केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर से कैलाश के लिए विधिवत रवाना हो गई।

डोली के प्रस्थान के दौरान ऊखीमठ क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। विद्वान आचार्यों द्वारा वेद ऋचाओं का पाठ, श्रद्धालुओं के जयकारे, महिलाओं के भजन तथा आर्मी बैंड और स्थानीय वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।
इस अवसर पर ओंकारेश्वर मंदिर को लगभग 8 कुंतल विभिन्न प्रजातियों के पुष्पों से भव्य रूप से सजाया गया था। साथ ही कई श्रद्धालुओं द्वारा विशाल भंडारों का आयोजन भी किया गया।
शनिवार देर सायं मंदिर परिसर में भैरवनाथ पूजन संपन्न हुआ, जिसमें देश-विदेश से आए शिव भक्तों ने भाग लेकर विश्व शांति और समृद्धि की कामना की। रविवार को ब्रह्ममुहूर्त में पंचांग पूजन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए, जिसमें भगवान केदारनाथ सहित 33 कोटि देवी-देवताओं का आवाहन किया गया।

प्रातः 9 बजे डोली का विशेष श्रृंगार किया गया और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच आगामी यात्रा के निर्विघ्न संपन्न होने की कामना की गई। इसके पश्चात रावल भीमाशंकर लिंग ने मुख्य पुजारी टी. गंगाधर लिंग को पारंपरिक पगड़ी व अचकन पहनाकर छह माह तक केदारनाथ धाम में पूजा-अर्चना का संकल्प दिलाया।
सुबह 9:30 बजे डोली ने मंदिर की परिक्रमा कर कैलाश के लिए प्रस्थान किया। डोली के रवाना होते ही पूरा क्षेत्र “जय बाबा केदार” के जयकारों से गूंज उठा और श्रद्धालु बैंड की धुनों पर झूमते नजर आए।
यात्रा कार्यक्रम के अनुसार डोली रविवार को प्रथम रात्रि प्रवास के लिए फाटा पहुंचेगी, जबकि 20 अप्रैल को गौरीकुंड स्थित गौरी माता मंदिर में द्वितीय रात्रि प्रवास करेगी। 21 अप्रैल को डोली केदारनाथ धाम पहुंचकर भंडार गृह में विराजमान होगी। इसके बाद 22 अप्रैल को प्रातः 8 बजे शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।
इस दौरान केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल, राज्य मंत्री चंडी प्रसाद भट्ट, बद्री-केदार मंदिर समिति के पदाधिकारी, जिला प्रशासन के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु मौजूद रहे।

