चमोली में गहराया रसोई गैस संकट, ठंडे पड़े चूल्हे
होटल-ढाबे बंदी की कगार पर, महिलाएं फिर जंगलों से ढो रहीं लकड़ी
पर्यटन सीजन से पहले चमोली में गैस संकट ने बढ़ाई चिंता
चमोली। सीमांत जनपद चमोली में रसोई गैस (एलपीजी) का संकट अब आम जनजीवन पर भारी पड़ने लगा है। गैस आपूर्ति बाधित होने से जिले के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में हाहाकार मचा हुआ है। हालात ऐसे हैं कि एक ओर घरों के चूल्हे ठंडे पड़ रहे हैं, तो दूसरी ओर होटल-ढाबों का कारोबार ठप होने की कगार पर पहुंच गया है।

जिले के मुख्य बाजारों और यात्रा मार्गों पर स्थित होटल, ढाबे और छोटे भोजनालय गैस की कमी से जूझ रहे हैं। संचालकों का कहना है कि सिलेंडरों का स्टॉक लगभग समाप्त हो चुका है, जिससे ग्राहकों को भोजन उपलब्ध कराना मुश्किल हो गया है। इससे न केवल व्यापार प्रभावित हो रहा है, बल्कि पर्यटन सीजन से पहले स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और अधिक गंभीर बनी हुई है। कई गांवों में हफ्तों से सिलेंडर रीफिल नहीं हो पा रहे हैं, जिसके चलते लोग फिर से पारंपरिक चूल्हों का सहारा लेने को मजबूर हैं। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को उठानी पड़ रही है। उज्ज्वला योजना के दावों के बीच पहाड़ की महिलाएं एक बार फिर जंगलों से लकड़ी ढोने को विवश हैं।
स्थानीय वितरकों के अनुसार मुख्य डिपो से मांग के अनुरूप गैस आपूर्ति नहीं मिल पा रही है, जिससे बैकलॉग लगातार बढ़ता जा रहा है। खराब मौसम और दुर्गम सड़कों ने भी आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित किया है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि बुकिंग के बाद भी समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं।
एक ग्रामीण महिला ने बताया कि सिलेंडर खाली पड़े हैं। उम्मीद थी कि इस बार गैस आसानी से मिलेगी, लेकिन अब फिर से पुराने दिनों की तरह लकड़ियां जुटानी पड़ रही हैं।
इधर, जिला पूर्ति विभाग और स्थानीय प्रशासन ने जल्द आपूर्ति सुचारू करने का भरोसा दिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी तक राहत के संकेत नहीं दिख रहे हैं। यदि शीघ्र ही वितरण व्यवस्था सामान्य नहीं हुई, तो यह संकट आने वाले यात्रा और पर्यटन सीजन में जिले के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
