
मंत्रिमंडल में संतुलन साधा, लेकिन चमोली फिर छूटा हाशिये पर
प्रदेश अध्यक्ष का जिला ही खाली, क्या संदेश दे रहा है विस्तार?
सत्ता संतुलन की कवायद में चमोली फिर रहा उपेक्षित
मदन कौशिक समेत पांच विधायकों को मंत्री पद, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट भी नहीं दिला पाए जिले को स्थान
राजनीतिक रिपोर्ट
उत्तराखंड में मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही सत्ता संतुलन साधने की कोशिश एक बार फिर साफ नजर आई, लेकिन इस कवायद में सीमांत जनपद चमोली को निराशा हाथ लगी है। विस्तार में मदन कौशिक, भरत चौधरी, खजान दास, राम सिंह केड़ा और प्रदीप बत्रा को मंत्री पद देकर क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधने का प्रयास किया गया।
हालांकि, बदरीनाथ विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे चमोली जिले को इस बार भी कैबिनेट में प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका। यह स्थिति तब और अधिक चर्चा का विषय बन गई, जब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं बदरीनाथ के पूर्व विधायक महेन्द्र भट्ट भी अपने जिले के लिए मंत्री पद सुनिश्चित नहीं कर पाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चमोली, जो सामरिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, उसे लगातार नजरअंदाज किया जाना स्थानीय असंतोष को जन्म दे सकता है। चारधाम यात्रा की दृष्टि से अहम इस जिले की अनदेखी पार्टी के लिए भविष्य में चुनौती बन सकती है।
वहीं, संगठन और सरकार के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। अब देखना होगा कि आगामी चुनावी समीकरणों में भाजपा इस असंतुलन को कैसे साधती है और चमोली की नाराजगी को किस तरह दूर करती है।
