
पंचनाम देवताओं के चौक भर्की से विदा होकर माता कालिंका पहुंची बनतोली
रिपोर्ट रघुबीर नेगी
उर्गमघाटी : 35 वर्षों के अन्तराल के बाद मां भगवती कालिंका मैद्यूवधार देवी की नौ महीने की देवरा यात्रा पंचनाम देवताओं के चौक से विदा होकर वनतोली पहुंच गई है। 19 फरवरी को भूमि क्षेत्र पाल घंटाकर्ण एवं भर्की भूमियाल के सानिध्य में ग्रामीणों ने मां भगवती कालिंका मैद्यूवधार देवी को वनतोली के लिए विदा किया जहां पर तीन दिवसीय मेला माता कालिंका के पहुंचते ही शुरू हो गया है।

भर्की भूमियाल ने चनाप घाटी थैग के आराध्य जाख देवता पल्ला जखोला भूमियाल देवता एवं उर्गम घंटाकर्ण माता चंडिका दाणी को बुलावा भेजा है जो 21 फरवरी को बनतोली भर्की में अपने निशान छड़ी कटारें और ग्रामीणों के साथ मेले में पहुंचेंगे जिन्हें न्यूतारू कहा जाता है।
21 फरवरी को ध्याणी भत्ता
21 फरवरी को बनतोली भर्की में धियाण भत्ता का आयोजन एवं न्यूतारू का स्वागत किया जायेगा। अपने ससुराल से आई विवाहित बेटियां को माता कालिंका एवं भर्की भूमियाल बनतोली में अपनी विवाहित बेटियां जिन्हें धियाण कहा जाता है को भोग प्रसाद खिलाकर विदा करेंगे जिन्हें धियाण भत्ता कहा जाता है। 21 फरवरी की रात मुखोटा नृत्य के बाद सभी मुखोटे एवं देवर्षि नारद यानि बुड़देवा को विदा होगें।
22 फरवरी को गणचक्र
22 फरवरी को बनतोली भर्की में गणचक्र होगा जिसमें सम्पूर्ण देवी देवताओं का अवतार होगा एवं भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करेंगे माता कालिंका मैद्यूवधार की देवी भर्की भूमियाल सभी न्यूतारू को विदा करेंगे 23 फरवरी सुबह बह्रममुर्त में माता कालिंका मैद्यूवधार की देवी पूजा-अर्चना के बाद गर्भगृह में विराजमान हो जाएगी।
