
केएस असवाल
गौचर : तीन दिनों की पूजा-अर्चना के बाद रविवार को पालिका क्षेत्र के सात गांवों की आराध्य कालिंका देवी को गाजे – बाजे के साथ मूल मंदिर के लिए विदा कर दी गई है। विदाई क्षण इतना भावुक था कि सबकी आंखें छलछला गई।
गौचर पालिका क्षेत्र के सात गांवों की आराध्य कालिंका देवी का मूल मंदिर भटनगर गांव की सीमा में अलकनंदा नदी के किनारे पर स्थित है। एक परंपरा के अनुसार पनाई, बंदरखंड, रावलनगर आदि गांव देवी के मायके पक्ष के माने जाते हैं। भटनगर गांव ससुरारी तथा शैल गांव के शैली पंडित देवी के गुरु माने जाते हैं। मायके पक्ष के लोग हर साल अपनी आराध्य ध्याण को नंदाअष्टमी के पर्व पर मायके के मंदिर पनाई सेरे में लाकर पूजा – अर्चना कर क्षेत्र की खुशहाली की कामना करते हैं। पूर्व में यह आयोजन एक दिन का होता था। तब अष्टबलि देकर देवी की पूजा की जाती थी। लेकिन 70 के दशक में आए सामाजिक बदलाव के अष्टबलि प्रथा की जगह तीन दिनों तक हवन पूजन किया जाता है। इसी परंपरा के अनुसार इस कालिंका उत्सव डोली को बृहस्पतिवार को मायके के मंदिर में पहुंचाया गया था। रविवार को पूर्णाहुति के बाद जैसे ही देवी को ससुराल भेजने के लिए जैसे ही मंदिर से बाहर लाया गया तो तमाम देवी देवता अपने अपने पार्श्वों पर अवतरित होकर जहां खिलखिलाने लगे वहां वहां मौजूद सभी महिलाओं की आंखें छलछला उठी। किसी तरह देवी को मना बुझाकर ससुराल के लिए विदा कर दिया गया। इस तरह से तीन दिनों की पूजा-अर्चना का विधिवत समापन हो गया है। इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष जगदीश कनवासी , पूर्व अध्यक्ष उमराव सिंह,व्यापार संघ अध्यक्ष राकेश लिंगवाल, पालिकाध्यक्ष संदीप नेगी, जयकृत बिष्ट, पंडित बंशीधर शैली, गिरीश जोशी, अनसूया जोशी, आशीष जोशी, महेंद्र बिष्ट आदि तमाम गणमान्य लोग मौजूद रहे।

