ऊखीमठ : भावुक विदाई के बीच वैरागना से विदा हुईं कालीमाई, खड़िया में पुष्पवर्षा से हुआ भव्य स्वागत

Team PahadRaftar

आगामी दिनों में केदारनाथ धाम पहुंचेगी दिवारा यात्रा, 15 साल बाद कालीमाई और बाबा केदार के ऐतिहासिक मिलन के साक्षी बनेंगे श्रद्धालु

लक्ष्मण नेगी ऊखीमठ। सरस्वती नदी के पावन तट पर विराजमान भगवती कालीमाई की द्वितीय चरण की दिवारा यात्रा इन दिनों गांव-गांव भ्रमण कर रही है। वैरागना गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दिव्य डोले का भव्य स्वागत किया। प्रवास के बाद जब यात्रा अगले पड़ाव के लिए रवाना हुई तो ग्रामीण भावुक हो उठे। महिलाओं ने मंगलगीत गाकर और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों के बीच मां को भावभीनी विदाई दी।

वैरागना से विदाई के दौरान श्रद्धालुओं ने मां के दिव्य डोले के दर्शन कर सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। मां के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

पुष्पवर्षा से किया स्वागत

रात्रि प्रवास के लिए भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा जैसे ही खड़िया गांव की सीमा में पहुंची, ग्रामीणों में उत्साह की लहर दौड़ गई। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर मां का स्वागत किया। गांव की गलियों और घरों की चौखटों पर लोग मां के दर्शन के लिए खड़े रहे। विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद लिया।

दिवारा यात्रा के दौरान गांव-गांव में धार्मिक आस्था के साथ पहाड़ की लोक संस्कृति और परंपराओं की झलक भी देखने को मिल रही है। ग्रामीण पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अपनी आराध्य देवी की अगवानी और विदाई कर रहे हैं।

केदारनाथ में होगा ऐतिहासिक मिलन

दिवारा यात्रा समिति के अध्यक्ष लखपत राणा ने बताया कि आगामी दिनों में यात्रा केदारनाथ धाम पहुंचेगी। यहां करीब 15 वर्षों बाद भगवती कालीमाई और बाबा केदार का ऐतिहासिक मिलन होगा। इस धार्मिक अवसर को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।

उन्होंने बताया कि मान्यता के अनुसार दोनों आराध्य शक्तियों का मिलन दुर्लभ धार्मिक अवसर माना जाता है। इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालुओं के केदारनाथ पहुंचने की संभावना है।

दिवारा यात्रा प्रभारी प्रकाश पुरोहित ने बताया कि यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर ग्रामीण मां कालीमाई की पूजा-अर्चना, स्वागत और विदाई पारंपरिक तरीके से कर रहे हैं। इससे स्थानीय धार्मिक परंपराओं और लोक आस्था को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी मिल रहा है।

दिवारा यात्रा से लौट रहे प्रवासी

समिति के महामंत्री सुरेशानंद गौड़ ने कहा कि कालीमाई की दिवारा यात्रा धार्मिक आयोजन के साथ पहाड़ की लोक संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है। मां के गांव में पहुंचने के साथ प्रवासी ग्रामीण भी अपने पैतृक गांवों की ओर लौट रहे हैं। इससे गांवों में रौनक बढ़ गई है और लंबे समय बाद ग्रामीणों के आपसी मिलन का अवसर भी बन रहा है।

इस अवसर पर आचार्य सतीश गौड़, शिवम भट्ट, ऋषिराम भट्ट, हरीश गौड़, समिति उपाध्यक्ष सुदर्शन राणा, कोषाध्यक्ष पुष्कर सिंह, प्रचार प्रमुख देवेंद्र राणा, प्रधान प्रदीप राणा, आशीष राणा, रविंद्र राणा, कुंवर सिंह राणा, केदार सिंह राणा, संदीप राणा, नरोत्तम सिंह राणा सहित विभिन्न गांवों के सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।

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