चमोली : आखिरी उम्मीद भी टूटी, दो छात्रों के जाने से जैंसाल विद्यालय हुआ बंद

Team PahadRaftar

दो छात्रों के जाने के बाद बंदी की नौबत; पलायन और बुनियादी सुविधाओं की कमी बना कारण

दशोली (चमोली) : पहाड़ों से हो रहे लगातार पलायन का असर अब शिक्षा व्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। चमोली जिले के दशोली ब्लॉक स्थित जैंसाल प्राथमिक विद्यालय इसका ताजा उदाहरण है, जहां छात्र संख्या शून्य होने के बाद विद्यालय बंदी की स्थिति में पहुंच गया है।

कुछ समय पहले तक विद्यालय में केवल दो छात्र पढ़ रहे थे, लेकिन बेहतर शैक्षणिक माहौल और गतिविधियों के अभाव में दोनों बच्चों ने भी अन्य विद्यालयों में प्रवेश ले लिया। इसके साथ ही जैंसाल प्राथमिक विद्यालय पूरी तरह छात्रविहीन हो गया।

इस स्थिति के बाद शिक्षा विभाग ने भी कार्रवाई तेज कर दी है। उप शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) दशोली पंकज कुमार उप्रेती द्वारा जारी निर्देशों में विद्यालय की चल संपत्तियों—अभिलेख, फर्नीचर, पठन-पाठन सामग्री और किचन सामग्री—को राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सियासैंण में स्थानांतरित करने को कहा गया है। वहीं विद्यालय की अचल संपत्तियां—भूमि, भवन और किचन शेड—को ग्राम सभा जैंसाल को सामुदायिक उपयोग के लिए सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में विद्यालय के पुनः संचालन की स्थिति में ये संपत्तियां वापस विद्यालय को लौटा दी जाएंगी।

स्थानीय लोगों के अनुसार, गांव में सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव लंबे समय से बना हुआ है। गांव को जोड़ने वाली करीब दो किलोमीटर सड़क पिछले एक दशक से अधूरी पड़ी है। ऐसे में ग्रामीण अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए पलायन को मजबूर हैं।

नवयुवक दल अध्यक्ष कैलाश डंडरियाल का कहना है कि जब तक गांवों में आधारभूत सुविधाओं का विकास नहीं होगा, तब तक पलायन नहीं रुकेगा और ऐसे ही विद्यालय बंद होते रहेंगे।

राज्य स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है। आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में पिछले पांच वर्षों के दौरान 800 से अधिक सरकारी विद्यालय बंद हो चुके हैं। कर्णप्रयाग और यमकेश्वर के हालिया मामलों के बाद जैंसाल का विद्यालय भी इस सूची में शामिल हो गया है।

फैक्ट फाइल

  • जैंसाल प्राथमिक विद्यालय: अब छात्र संख्या शून्य
  • अंतिम दो छात्रों ने भी लिया दूसरे स्कूल में प्रवेश
  • 5 वर्षों में प्रदेश में 800+ विद्यालय बंद
  • 10 वर्षों से अधूरी गांव की सड़क

जैंसाल की यह घटना केवल एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि पहाड़ों में घटती आबादी और कमजोर होती शिक्षा व्यवस्था की बड़ी तस्वीर को सामने लाती है। यदि समय रहते बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में और भी विद्यालय बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।

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