
भर्की गांव में वर्षा के बीच भव्य नंदा महोत्सव आयोजित, जागरों से मां नंदा को कैलास के लिए किया विदा, इस दौरान मैतियों की आंखें छलछला उठी
रघुबीर नेगी
उर्गमघाटी : भारी वर्षा के बीच कुछ पल मायके में अपने मैतियों, बहिनों – भाइयों से भेंटकर भगवती नन्दा स्वनूल आज कैलास के ऊ विदा हो गई। मैतियों ने स्थानीय उत्पाद समौण के साथ भीगी पलकों के साथ जागरों के माध्यम से नन्दा नन्दीकुड एवं स्वनूल को सोना शिखर के लिए विदा किया।

भर्की दशमी मेला में भूमि क्षेत्र पाल घंटा कर्ण व भर्की भूमियाल के सानिध्य में नन्दा स्वनूल देवी नन्दीकुंड व सोना शिखर के लिए विदा हुई। 36 घंटे के जागरों के गायन के बाद भर्की भूमियाल की भूमि से अपने आपने स्थान के लिए विदा हो गई। जागरों झमेलों दाकुडी के बीच भक्तों को सुख – समृद्धि का आशीष देकर भगवती कुछ पल मायके में बिताने के बाद हिमालय की सुरम्य वादियों के लिए भीगी आखियों के साथ विदा हुई । गौरतलब है कि श्री फ्यूलानारायण के कपाट बंद होने के बाद होता है दशमी मेला जिसमें भूमियाल देवता उर्गम भर्की भूमियाल से मिलन हेतु जाते है जिसे स्थानीय भाषा में न्यूतारू कहा जाता है।

