लक्ष्मण नेगी ऊखीमठ। शारदीय नवरात्र में सिद्धपीठ कालीमठ में मां भगवती के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मां के जयकारों से कालीमठ घाटी का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंच रहे श्रद्धालु मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही से घाटी के यात्रा पड़ावों पर भी रौनक लौटने लगी है।
नवरात्र में सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिद्धपीठ कालीमठ में मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की आराधना का विशेष महत्व है। मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालु लोक कल्याण और विश्व शांति की प्रार्थना कर रहे हैं।
पंडित दिनेश चंद्र गौड़ ने बताया कि शारदीय नवरात्र शक्ति उपासना, आत्मशुद्धि और साधना का पर्व है। नौ दिनों तक मां भगवती के विभिन्न स्वरूपों की आराधना से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मबल मिलता है। वहीं, वेदपाठी रमेश चंद्र भट्ट ने कहा कि सिद्धपीठ कालीमठ प्राचीन धार्मिक परंपराओं और देवी उपासना का महत्वपूर्ण केंद्र है। श्रद्धालुओं को मंदिर की गरिमा बनाए रखने के साथ स्वच्छता और परंपराओं के संरक्षण पर भी ध्यान देना चाहिए।
श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही से कालीमठ घाटी की दुकानों, भोजनालयों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी चहल-पहल बढ़ी है। इससे स्थानीय व्यापारियों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों में उत्साह है।

