चन्द्रनगर : आस्था, प्रकृति और शांति का अनुपम संगम तीर्थाटन और पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं क्यूंजा घाटी में।
लक्ष्मण नेगी
ऊखीमठ : क्यूंजा घाटी की सुरम्य वादियों में स्थित चन्द्रनगर अपनी अद्भुत प्राकृतिक छटा, धार्मिक महत्ता और शांत वातावरण के कारण एक महत्वपूर्ण हिल स्टेशन के रूप में पहचान बना रहा है। सीढीनुमा खेत – खलिहानों की गोद में बसा यह रमणीय स्थल प्रकृति प्रेमियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहां की हरियाली, स्वच्छ वातावरण, ऊँचे-ऊँचे पर्वत और कल-कल बहते जल स्रोत लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

चन्द्रनगर क्षेत्र धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह क्षेत्र प्राचीन काल से साधु-संतों की तपस्थली रहा है। आसपास स्थित प्राचीन मंदिरों और देवस्थलों में श्रद्धालु वर्षभर दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां की धार्मिक परम्पराएं, पूजा-अर्चना की विधियां और स्थानीय मेले-त्योहार क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति और आस्था को दर्शाते हैं। प्राकृतिक दृष्टि से चन्द्रनगर का सौंदर्य मनमोहक है। चारों ओर फैले घने बांज, बुरांश, देवदार और काफल के वृक्ष इस क्षेत्र की शोभा बढ़ाते हैं। वसंत ऋतु में जब बुरांश के लाल फूल खिलते हैं तो पूरी घाटी लालिमा से आच्छादित हो उठती है। सुबह-शाम पर्वतों पर पड़ती सूर्य की किरणें यहां के वातावरण को और भी अलौकिक बना देती हैं। चन्द्रनगर से हिमालय व देव सेनापति भगवान कार्तिकेय की तपस्थली क्रौंंच पर्वत की ऊँची चोटियों के मनोहारी दृश्य भी दिखाई देते हैं। साफ मौसम में दूर-दूर तक फैली पर्वत श्रृंखलाएं और घाटियों का अद्भुत दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। यहां के शांत और स्वच्छ वातावरण में आने वाला हर व्यक्ति प्रकृति की गोद में अद्भुत शांति और सुकून का अनुभव करता है। स्थानीय ग्रामीणों के लिए भी चन्द्रनगर आस्था और आजीविका का महत्वपूर्ण केंद्र है। पर्यटन की संभावनाओं के कारण यहां के लोग होमस्टे, कृषि और पारंपरिक उत्पादों के माध्यम से अपनी आजीविका सुदृढ़ करने की दिशा में प्रयासरत हैं। यदि इस क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं का और विकास किया जाए तो यह स्थान भविष्य में उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना सकता है। सामाजिक कार्यकर्ता कुंवर सिंह नेगी का कहना है कि क्यूंजा घाटी का चन्द्रनगर प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का अनमोल संगम है। यह स्थान न केवल स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है बल्कि प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। यहां की शांत व पवित्र वादियां हर आने वाले को अपनी ओर खींच लेती हैं और हिमालय की दिव्यता का साक्षात्कार कराती हैं। प्रधान डां गौरव कठैत का कहना है कि यदि प्रदेश सरकार कार्तिक स्वामी तीर्थ को पांचवां धाम घोषित करती है तो क्यूंजा घाटी के हिल स्टेशनों को पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान मिल सकती है। पूर्व प्रधान महेन्द्र रावत का कहना है कि यदि पर्यटन विभाग क्यूंजा घाटी के तीर्थ स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार करता है तो क्यूंजा घाटी के तीर्थ स्थलो का सर्वांगीण विकास होने के साथ स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
