औली : ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट कार्यक्रम जीबीबीसी के तहत पक्षी गणना हेतु जुटेंगे पक्षी प्रेमी, बर्ड वाचिंग क्लब औली ज्योर्तिमठ करेगा मेजबानी।
टीम पहाड़ रफ्तार समाचार
चमोली जिले में बर्ड वाचिंग क्लब औली ज्योर्तिमठ द्वारा GBBC बर्ड काउंट का जिम्मा सौंपा गया है। बता दें कि बर्ड काउंट इंडिया के तत्वाधान में 13फरवरी से 16फरवरी के मध्य ज्योतिर्मठ क्षेत्र के अलग – अलग पक्षी अवलोकन साईट में यह कार्यक्रम रखा गया है। बर्ड वाचिंग क्लब औली ज्योर्तिमठ के अध्यक्ष और क्षेत्र के बर्ड वाक् एक्सपर्ट संजय कुंवर ने बताया कि इस वृहद पक्षी अवलोकन कार्यक्रम में इस बार क्षेत्र के नए युवा पक्षी प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों को भी इस पक्षी अवलोकन जागरूकता अभियान से जोड़ा जा रहा है। जिसमें विशेष रूप से प्रकृति प्रेमी पर्यटकों और स्थानीय विद्यालयों के युवाओं को भी प्रेरित किया जा रहा है कि इस पक्षी गणना अभियान के उद्वेश्य को सफल बनाया जाय। यह कार्यक्रम पूरे उत्तराखंड में आयोजित किए जा रहे हैं। ज्योर्तिमठ में यह अभियान ज्योर्तिमठ, टीवी टावर, सुनील,बर्ड वाचिंग साईट औली, सहित ढाक,खुलारा, कुंवारी पास ट्रैक रूट और ज्योर्तिमठ नगर क्षेत्र की विभिन्न पक्षी अवलोकन साइटों पर चलाया जाएगा। जहां बर्ड वाचिंग क्लब औली के अनुभवी बर्ड वाचिंग एक्सपर्ट द्वारा नए पक्षी प्रेमियों को बर्डिंग सिखाई जाएगी और 15मिनट की बर्ड वाचिंग कर साइटिंग के साथ ई बर्ड पर अपलोड की जाएगी। इस दौरान कोई भी जागरूक पक्षी प्रेमी प्रकृति प्रेमी बर्ड वाचिंग क्लब औली ज्योर्तिमठ के साथ मिलकर इस इवेंट्स का हिस्सा बन सकता है।

दरअसल ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट (GBBC) एक वैश्विक पक्षी गणना कार्यक्रम है, जो हर साल फरवरी के मध्य में आयोजित किया जाता है। यह कार्यक्रम पक्षियों की आबादी और उनके आवासों के बारे में डेटा एकत्र करने के लिए आयोजित किया जाता है, जिससे वैज्ञानिकों को पक्षियों की संख्या और उनके प्रवास के पैटर्न को समझने में मदद मिलती है।
इस कार्यक्रम में, पक्षी प्रेमी और आम जनता अपने आसपास के क्षेत्रों में पक्षियों की गणना करते हैं और अपने निष्कर्षों को ऑनलाइन साझा करते हैं। यह कार्यक्रम 1998 में शुरू किया गया था और अब यह दुनिया भर में आयोजित किया जाता है इस कार्यक्रम का मुख्य उद्वेश्य पक्षियों की आबादी और उनके आवासों के बारे में डेटा एकत्र करना। पक्षियों की संख्या और उनके प्रवास के पैटर्न को समझना। पक्षियों के संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाना।

