गोविंदघाट : फूलों की घाटी के दीदार को आज पहुंचे एक विदेशी सहित 64 पर्यटक

Team PahadRaftar

संजय कुंवर की रिपोर्ट 

गोविंदघाट : विश्व धरोहर फूलों की घाटी के दीदार के लिए देश – विदेश से प्रकृति प्रेमियों एवं पर्यटकों द्वारा लगातार घाटी की ओर रूख किया जा रहा है। जिससे घाटी में चहल-पहल बढ़ गई है। पार्क प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा को लेकर सभी तैयारियां की गई हैं।

उत्तराखंड के चमोली जिले के सीमांत जोशीमठ गोविन्दघाट में स्थित फूलों की घाटी समुद्रतल से लगभग 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। जो 87.5 किमी क्षेत्र में फैला हुआ है। फूलों की घाटी में जून से अगस्त माह के मध्य 350 से अधिक प्रजातियों के पुष्प खिले होते हैं। जिसे 14 जुलाई 2005 को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था। हर वर्ष एक जून को फूलों की घाटी पर्यटकों के दीदार के लिए खोल दी जाती है। जहां हर वर्ष हजारों प्रकृति प्रेमी एवं पर्यटकों पहुंचते हैं। इस वर्ष भी फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए एक जून को खोल दी गई है। पहले दिन 50 से अधिक पर्यटकों ने घाटी में प्रवेश किया। वहीं दूसरे दिन 63 भारतीय व एक विदेशी पर्यटक ने घाटी में पहुंचे, जिससे घाटी के बेसकैंप घांघरिया में होटल व्यवसाई एवं ट्रैकिंग व्यवसायों के चेहरे खिले हुए हैं। फूलों की घाटी वन क्षेत्राधिकारी चेतना काण्डपाल ने बताया है कि सोमवार 2 जून को घाटी में 63 भारतीय पर्यटकों के साथ एक विदेशी पर्यटक ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज की है पार्क प्रशासन द्वारा पुष्पवती नदी के उदगम स्थल टिपरा खर्क, कुंठ खाल क्षेत्र तक के इलाके में वैली की वन संपदा और वन्य जीवों की सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था की है। घाटी के चप्पे चप्पे पर पार्क कर्मियों द्वारा कड़ी नजर रखी जा रही है।

फूलों की घाटी की खोज 

फूलों की घाटी की खोज 1931 में ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक एस स्माइथ ने अपने सहयोगी के साथ की थी। स्माइथ ने घाटी की सुन्दरता से प्रभावित होकर 1938 में द वैली का फ्लावर्स पुस्तक लिखी।

 

 

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