नंदानगर आपदा में मां की ममता, दोनों बच्चों को सीने से लिपटाकर मलबे में दफन हो गईं कांता, सात चिताएं एक साथ जलती देख लोगों की आंखें नम हो गई
केएस असवाल
चमोली : इन आंखों का दर्द शायद ही कभी भर पायेगा, बच्चों को बचाने के लिए आखरी सांस तक मां ने नहीं छोड़ा बच्चों का साथ। दो मासूम बच्चों के साथ चली गई जान। पिता जीवित निकले मगर अपनों के आने का है इंतजार. शायद जो अब कभी लौट कर नहीं आएंगे। जब रेस्क्यू टीम द्वारा इन मासूम बच्चे और उनकी मां का मृत शरीर निकला जा रहा था तब लगा शायद दुःख तो सब के जीवन में है मगर इतना दर्दनाक दुःख जिसे देख कर सब की आंखे भर आई।
चमोली के नंदानगर क्षेत्र में बुधवार देर रात आई आपदा ने कई परिवारों को प्रभावित किया है। जिसमें कुंतरी गांव की कांता देवी देवी और उनके जुड़वा बच्चों की दुखद कहानी भी शामिल है। शुक्रवार को जब यहां खोजबीन टीम ने मलबे में दबे कांता देवी और उनके बच्चों के शवों को निकाला, तो वहां मौजूद सभी की आंखों में आंसू आ गए। मलबे में दफन कांता देवी ने अपने दोनों बच्चों को सीने से लगाकर रखा था।
कुंतरी गांव में आई इस आपदा में कुंवर सिंह, उनकी पत्नी कांता देवी (38) और दो जुड़वा बच्चे 10 वर्षीय विकास व विशाल मलबे में दब गए थे। घटना के लगभग 16 घंटे बाद राहत कार्यों में जुटी टीमों ने कुंवर सिंह को तो जीवित निकाल लिया, लेकिन उनकी पत्नी और बच्चों का पता नहीं चला था। शुक्रवार को टीमों ने फिर से मलबा हटाना शुरू किया तो मकान के एक हिस्से में कांता देवी और उनके बच्चों के शव दबे हुए थे। तीनों एक – दूसरे से लिपटे हुए थे। विकास और विशाल कक्षा चार में पढ़ते थे।कुंवर सिंह मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार का पालन – पोषण करते थे और हाल ही में उन्होंने नया मकान बनवाया था, लेकिन आपदा ने उनकी खुशियों को छीन लिया। श्रीनगर मेडिकल कालेज में भर्ती कुंवर सिंह ने स्थानीय लोगों से बातचीत में बताया कि सैलाब आने से पहले पत्नी और बच्चों को सुरक्षित घर से बाहर भेज दिया था। इसके बाद भी उनकी जान नहीं बच सकी।
आपदा में उजड़ गया कुंवर का हंसता खेलता परिवार
कुंतरी गांव में 16 घंटे तक मलवे में फंसे रहने के बाद जीवित निकाले गए कुंवर सिंह को उनकी गंभीर हालत को देखते हुए शुक्रवार को एयरलिफ्ट कर हायर सेंटर श्रीनगर मेडिकल कालेज ले जाया गया। गुरुवार को उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। बताया गया कि कुंवर सिंह के स्वास्थ्य में अब सुधार है, लेकिन उन्हें पत्नी बच्चों की मौत के बारे में नहीं बताया गया है। वह बार-बार पूछते हैं कि उनके बच्चे और पत्नी कहां हैं। स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया कि वह सुरक्षित आपदा राहत शिविर में हैं। कुंवर सिंह की पत्नी और दो बेटे भी मलबे में दब गए थे, जिनके शव शुक्रवार को मिले। पोस्टमार्टम के बाद तीनों का अंतिम संस्कार नंदप्रयाग के चक्रप्रयाग घाट पर नंदाकिनी नदी के किनारे किया गया।
नंदानगर के कुंतरी लगा फाली, सरपाणी में आपदा में हुए मृतक सात लोगों का सामूहिक अंतिम संस्कार नंदानगर के चक्रप्रयाग घाट नंदाकिनी व चुफलाघाट के संगम तट पर किया गया। इस दौरान उपस्थित क्षेत्र के लोगों की आंखें नम हो गई। अंतिम संस्कार में पूरे क्षेत्र वासियों ने शिरकत कर मृतकों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सात चिताएं एक साथ जलती देख वहां से गुजरने वालों की भी आंखें नम हो गई।
