
‘स्मृतियों से संकल्प तक’ थीम पर देशभर के 160 सदस्य जुड़े, पारंपरिक ज्ञान और स्वस्थ जीवनशैली पर होगा मंथन
देहरादून। योग, आहार, कृषि, स्वदेशी, शिक्षा और संस्कार को समर्पित योगाहार ने अपनी यात्रा के 2000 दिन पूरे कर लिए हैं। इस उपलब्धि पर शुक्रवार को चार दिवसीय विशेष उत्सव का शुभारंभ हुआ। ‘स्मृतियों से संकल्प तक’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से करीब 160 सदस्य ऑनलाइन जुड़े और अपने अनुभव साझा किए।
गूगल मीट के माध्यम से आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और मंगल गीत के साथ हुआ। दिल्ली की वरिष्ठ सदस्य डा. कुसुम भारद्वाज ने मंगल गीत प्रस्तुत किया। देहरादून के पवन कुमार ने योगाहार की 2000 दिनों की यात्रा और उपलब्धियों की जानकारी दी। महाराष्ट्र की रंजना किन्हीकर ने वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से पुरानी स्मृतियां साझा कीं। मध्य प्रदेश के मुन्नीलाल यादव जनसेवक और नारायण मीणा ने कार्यक्रम का संचालन किया।
कार्यक्रम में उत्तराखंड सहित दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, असम, हरियाणा, राजस्थान, झारखंड और नागालैंड समेत विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों ने सहभागिता की। इस दौरान स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीने के महत्व पर जोर दिया गया।
तीन दिन होंगे पुस्तक विमोचन और संवाद
उत्सव के तहत 24 अक्टूबर को ‘परंपरागत बीज नायक’ विषय पर पुस्तक विमोचन और संवाद होगा। इसमें पारंपरिक बीजों के संरक्षण तथा देशज कृषि विरासत को सहेजने में जुटे लोगों के योगदान पर चर्चा की जाएगी।
25 अक्टूबर को ‘भारतीय चिकित्सा के नायक’ विषय पर पुस्तक विमोचन और विशेष चर्चा आयोजित होगी। वहीं, 26 अक्टूबर को ‘योगाहार और भविष्य’ विषय पर समापन सत्र में संगठन की भावी दिशा और नई संभावनाओं पर विचार-मंथन किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, चारों दिन कार्यक्रम सुबह 6:45 से 8 बजे तक होंगे। इनमें सामूहिक प्रार्थना, विशेष प्रस्तुतियां, पुस्तक विमोचन और अनुभव साझा करने के सत्र शामिल रहेंगे।
योगाहार के 2000 दिन पूरे होने का यह आयोजन स्वस्थ जीवनशैली, पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति के अनुकूल जीवन पद्धति को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ आयोजित किया जा रहा है।
