
भूमि क्षेत्र पाल घंटाकर्ण भर्की भूमियाल वजीर देवता के सानिध्य में नम आंखों के साथ विदा हुई मां भगवती कालिंका मैद्यूवधार देवी। नौ माह भ्रमण के बाद आज गर्भगृह में हुई विराजमान।
रिपोर्ट रघुबीर सिंह
35 वर्षों के बाद आयोजित नौ माह की देवरा यात्रा मां भगवती कालिंका मैद्यूवधार देवी के भर्गगृह जिसे स्थानीय भाषा में थान कहा जाता है विराजमान हो गयी लगभग 1500 किमी से अधिक नंगे पांव पैदल यात्रा 1000 से अधिक गांवों का भ्रमण 800 धियाणियों की विदाई के बाद 22 फरवरी को मां भगवती कालिंका मैद्यूवधार देवी ने भर्की गांव के बनतोली में सम्पन्न भक्तों थैं
ग जाख देवता पल्ला जखोला भूमियाल उर्गम घंटाकर्ण के न्यूयारू को विदा कर आज 23 फरवरी सुबह ब्रह्म मुहूर्त में गर्भगृह में विराजमान हो गई।
9 फरवरी से 21 फरवरी तक विभिन्न भोज जिसे भत्ता कहा जाता है का आयोजन किया गया। 21 फरवरी को धियाणियां विवाहित बेटियां के लिए धियाण भत्ता दिया गया जिससे 800 बेटियां ने अपनी आराध्य मायके की भगवती कालिंका मैद्यूवधार देवी का भोज ग्रहण किया धियाण भत्ता सबसे भावुक पल होता है देवी ने सबको समझा बुझाकर सुख समृद्धि एवं खुशहाली रक्षा का बचन देकर इस आशा के साथ विदाई दी कि जब भी कोई संकट आयेगा मैं हमेशा तुम्हारे साथ खड़ी रहूंगी। मिलना एवं विछड़ना यही जीवन की रीति है । हमारी संस्कृति में धियाण का सम्मान सबसे बड़ा होता है नम आंखें लगातार बहती आंसुओं की धारा अपनी आराध्य से विदा लेना मुश्किल क्षण था जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
21 फरवरी की रात देवर्षि नारद यानि बुड़देवा (नारद मुनि) भी भावुक होकर नौ माह साथ रहकर मनुष्यों के बीच से विदा होकर अपने स्थान लौट गये साथ ही सभी मुखोटे भी ब्रह्म मूर्त में विदा किये गए।
22 फरवरी को बनतोली में गणचक्र न्यूतारू विदाई की गयी। 23 फरवरी सुबह ब्रह्म मुहूर्त में माता कालिंका मैद्यूवधार देवी अपने अपने गर्भगृह में विराजमान हो गयी।
