
रघुबीर नेगी की खास रिपोर्ट
चमोली : उर्गमघाटी के भर्की क्षेत्र की आराध्य देवी मां कालिंका देवरा यात्रा 34 वर्षों बाद नौ महा भ्रमण के बाद अब अपने मूल स्थान भर्की गांव पहुंचकर अपने भक्तों और धियाणियों से मिलन कर आशीर्वाद दे रही है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भर्की गांव पहुंचकर आशीष ले रहे हैं। ध्याणियां भी गांव मायका पहुंचने लगे हैं। विभिन्न धार्मिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद 23 फरवरी को मां कालिंका देवरा यात्रा संपन्न होकर पूजा – अर्चना के बाद गर्भगृह में विराजमान हो जाएगी।

उर्गमघाटी के भर्की गांव आजकल भक्तिमय बना हुआ है।
माता कालिंका मैदयूल धार देवी (मायाधार देवी) देवरा यात्रा 10 जुलाई 2025 को गर्भगृह से बाहर आकर नौ महा तक सैकड़ों गांवों का भ्रमण कर अपनी ध्याणियों और श्रद्धालुओं की कुशलक्षेम पूछकर आशीर्वाद देकर अब अपने मूल स्थान भर्की गांव पहुंच गई है। भर्की, भेटा, अरोसी गांव की आराध्य देवी मां कालिंका के दर्शन के लिए आजकल बड़ी संख्या में ध्याणियां व श्रद्धालु भर्की गांव पहुंचकर मां कालिंका का आशीर्वाद ले रहे हैं। मां कलिंका देवरा यात्रा अब अपनी अंतिम पड़ाव में है। सभी बहन बेटियां जो सूदूरवर्ती क्षेत्रों ससुराल में हैं सभी मायके पहुंच चुकी हैं जिन्हें स्थानीय भाषा में धियाणियां कहां जाता है। सभी ध्यांणियों द्वारा अपने – अपने गांव घर में मां कालिंका को भोग, अर्घ्य, फूल माला चुनरियां अर्पित किया गया है।

अब देवताओं की ओर से विदाई भोज प्रारंभ हो गये है जिसमें सबसे पहले श्री गणेश भत्ता 09 फरवरी, 11 फरवरी को भूमियाल भत्ता,13 फरवरी स्वनुल भत्ता,15 फरवरी कालिंका के पुजारी द्वारा भत्ता दिया जायेगा भत्ता, 16 फरवरी को पधान भत्ता,18 फरवरी को कालिंका भत्ता दिया जायेगा।
19 फरवरी को न्यूतारू बुलावा व माता कालिका मायाधार देवी बन्यात मे प्रस्थान करेगी ( समस्त भक्तों द्वारा माता को विदाई देना ), 21 फरवरी को उर्गम/ थैंग/ पल्ला जखोला से आने वाले भक्त जन यानि न्यूतारू का आवागमन , 22 फरवरी 2026 को न्यूतारू विदाई ( मेला समापन), 23 फरवरी को माता अपने मूल स्थान पर पूजा-अर्चना अर्चना के साथ अपने मूल स्थान गर्भगृह में विराजमान हो जाएगी।
विभिन्न गांवों का भ्रमण
नौ माह रथयात्रा मै मैय्या ब्लॉक जोशीमठ व दशोली गांवों के लगभग 945 किलो मीटर पैदल यात्रा व 98 गांवों में भ्रमण कर 181 दिनों तक पदयात्रा में रही। लगभग 180 ध्याणियों ने भत्ता दिया व 435 विभिन्न ध्यणियों ने माता को सूपा दिया (यानि सूपा को भरकर अनाज दिया जाता है ) 51 गांवों के लोगो ने अपने- अपने गांव में आवा भक्ति कर सामूहिक भत्ता दिया। इस भव्य देवरा रथयात्रा में आर्चाय पं० प्रशान्त, कालिका मायाधार देवी पुजारी गुड़वीर चौहान, जगरोई लक्ष्मण सिंह पंवार, रघुवीर सिंह चौहान, भूमियाल देवता पश्वा लक्ष्मण सिंह नेगी, दाणी माता पश्वा रणजीत सिंह चौहान, कालिंका धारी अशोक चौहान, प्रदीप पंवार, महेन्द्र रावत, मैदयुल धार देवी धारी अरविन्द फर्स्वाण, दर्शन चौहान, सुभाष रावत, प्रताप पंवार तथा भान दीपक, ढोल वादक जयदीप दास, प्रदीप व कुन्दन लाल ने लगातार सहयोग कर रहे हैं।भगवती की नौ माह पद रथयात्रा में कालिंका माता के साथ मैदयुल धार देवी (मायाधार देवी), देवता भूमियाल की छड़ी व भूमियाल व दाणी माता के निशान जिन्हें कटारे कहा जाता है।
मेला समिति के अध्यक्ष हर्षवर्धन फर्स्वाण कोषाध्यक्ष नंदा सिंह नेगी, उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह रावत, सचिव रघुवीर सिंह चौहान ने इस यात्रा का संचालन किया। 34 वर्षों के बाद नौ माह की रथ यात्रा अब अपने अन्तिम चरण बस कुछ ही दिन शेष रहे गये है माता कालिंका देवी नृत्य के साथ अब दोपहर में भोग प्रसाद ग्रहण करने के साथ साथ आप मुखौटा नृत्य का भी आनंद ले सकते हैं भर्की गांव सड़क मार्ग से जुड़ा है। इसलिए आप मेला स्थल तक वाहन से आसानी से पहुंच सकते हैं। तो आइये कुछ दिन उर्गमघाटी के भर्की गांव में भर्की गांव कल्पेश्वर महादेव मंदिर के शीर्ष पर विराजमान हैं।

