लक्ष्मण नेगी
ऊखीमठ : हिमालय में सबसे ऊंचाई व चन्द्रशिला की तलहटी में विराजमान तृतीय केदार तुंगनाथ धाम में तीर्थ यात्रियों का आकंडा एक लाख , 10 हजार के पार पहुंच गया है। तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बन्द होने तक तीर्थ यात्रियों का आकंडा नया कीर्तिमान स्थापित कर सकता है।

विगत जुलाई व अगस्त महीनो में उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों पर आयी दैवीय आपदा के कारण तुंगनाथ धाम पहुंचने वाले तीर्थ यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट देखने को मिली थी। मगर मगर इन दिनों तुंगनाथ घाटी का मौसम खुशनुमा होने के कारण तुंगनाथ धाम की यात्रा पुनः परवान चढ़ने लगी है । तुंगनाथ धाम में तीसरे व अन्तिम चरण की यात्रा परवान चढ़ने से तुंगनाथ धाम सहित तुंगनाथ घाटी के यात्रा पड़ावों पर रौनक लौटने लगी है तथा प्रतिदिन सैकड़ों तीर्थ यात्री चन्द्र शिला के शिखर पर पहुंचकर वहां की खूबसूरती से भी रुबरू हो रहे हैं। मन्दिर समिति से मिली जानकारी के अनुसार तुंगनाथ धाम में अभी तक 1 लाख, 10 हजार से अधिक तीर्थ यात्रियों ने पूजा – अर्चना व जलाभिषेक कर विश्व समृद्धि की कामना की है। इस वर्ष तुंगनाथ धाम में भारी संख्या में तीर्थ यात्रियों, पर्यटकों व सैलानियों की आवाजाही होने से तुंगनाथ घाटी के तीर्थाटन पर्यटन व्यवसाय में भारी इजाफा होने के साथ मन्दिर समिति की आय में भी वृद्धि हुई है।
तुंगनाथ धाम के प्रबन्धक बलवीर नेगी ने बताया कि अभी तक तुंगनाथ धाम में 53 हजार 323 पुरूषों, 46 हजार 577 महिलाओं, 10 हजार 064 नौनिहालों , 312 साधु – संन्यासियों व 23 विदेशी सैलानियों सहित 1,10,299 तीर्थ यात्रियों ने तुंगनाथ धाम पहुंच कर पुण्य अर्जित किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष भगवान तुंगनाथ के कपाट खुलने के बाद से ही तीर्थ यात्रियों की आवाजाही मे भारी संख्या में शुरू हो गयी थी जो कि 20 जून तक जारी रही मगर जुलाई महीने के प्रथम सप्ताह मे मानसून लौटने के बाद तथा धराली , धराली ,छेनागाड, नंदानगर घाट व देहरादून की आपदाओं के कारण तुंगनाथ धाम की यात्रा भी खासी प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि तुंगनाथ घाटी में धीरे – धीरे मौसम खुशनुमा होता जा रहा है इसलिए अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह से तुंगनाथ धाम की यात्रा दुबारा परवान चढ़ने लगी है। मन्दिर समिति के चन्द्रमोहन बजवाल ने बताया कि चोपता से सीधे चन्द्र शिला शिखर जाने वाले पर्यटकों व सैलानियों को मन्दिर समिति के रिकार्ड में दर्ज नही किया है क्योंकि अधिकांश सैलानी प्रकृति के आनन्द लेने के लिए चोपता से सीधे चन्द्रशिला शिखर पहुंचते है। उन्होंने बताया कि तुंगनाथ धाम में तीसरे चरण की यात्रा परवान चढ़ने से तुंगनाथ धाम सहित तुंगनाथ घाटी के यात्रा पड़ावों पर रौनक बनी हुई है।
