
लक्ष्मण नेगी
ऊखीमठ : मदमहेश्वर घाटी की ग्राम पंचायत रासी से लगभग 14 किमी दूर सुरम्य मखमली बुग्यालों के मध्य व बूढ़ा मदमहेश्वर की तलहटी मे बसे द्वितीय केदार मदमहेश्वर धाम में मात्र 44 दिनों में तीर्थ यात्रियों का आकंडा 8 हजार के पार पहुंच गया है।

मदमहेश्वर घाटी में मानसून लौटने के बाद मदमहेश्वर धाम पहुंचने वाले तीर्थ यात्रियों की आवाजाही में हल्की गिरावट तो आई है मगर आगामी दिनो में शिव जी के पवित्र सावन मास शुरू होने पर मदमहेश्वर धाम की यात्रा दुबारा परवान चढ़ने के आसार बने हुए है। द्वितीय केदार मदमहेश्वर के कपाट बन्द होने तक तीर्थ यात्रियों का आकंडा 15 हजार के पार पहुंचने की सम्भावना बनी हुई है जो कि मदमहेश्वर धाम मे तीर्थ यात्रियों का पहला रिकार्ड होगा। इन दिनो मदमहेश्वर घाटी मे झमाझम बारिश होने से मदमहेश्वर धाम के चारों तरफ फैले सुरम्य मखमली बुग्याल हरियाली से आच्छादित होने से मदमहेश्वर धाम के प्राकृतिक सौन्दर्य पर चार चांद लगने शुरू हो गये है। मन्दिर समिति के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी यदुवीर पुष्वाण ने बताया कि इस वर्ष मदमहेश्वर धाम के कपाट विगत 21 मई को ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिये गये थे तथा मात्र 44 दिनो की अवधि में 6490 पुरूषों , 1585 महिलाओं, 281 नौनिहालों , 50 साधु – संन्यासियों व 5 विदेशी सैलानियों सहित 8411 तीर्थ यात्रियों ने मदमहेश्वर धाम मे पूजा – अर्चना व जलाभिषेक कर विश्व कल्याण की कामना की । उन्होने बताया कि मात्र 44 दिनो मे मदमहेश्वर धाम मे आठ हजार से अधिक तीर्थ यात्रियों का आकंडा मन्दिर समिति के रिकार्ड मे पहली बार दर्ज हुआ है तथा मदमहेश्वर धाम के कपाट शीतकालीन के लिए बन्द होने तक तीर्थ यात्रियों का आकंडा 15 हजार के पार पहुंचने की सम्भावना बनी हुई है । मदमहेश्वर धाम के हक – हकूकधारी शिव शरण पंवार ने बताया कि इन दिनों मदमहेश्वर धाम के चारों तरफ फैले सुरम्य मखमली बुग्याल हरियाली से आच्छादित होने के कारण मदमहेश्वर धाम की सुन्दरता से रूबरू होकर हर कोई अभिभूत हो रहा हो रहा है। उन्होने बताया कि अकतोली से मदमहेश्वर धाम तक फैले भू-भाग को भी प्रकृति ने अपने वैभवों का भरपूर दुलार दिया है इसलिए अकतोली से मदमहेश्वर धाम तक धरती के पग – पग पर पर्दापण करने से परम आनन्द की अनुभूति होती है । मदमहेश्वर घाटी विकास मंच पूर्व अध्यक्ष मदन भट्ट ने बताया कि मदमहेश्वर धाम मे इस वर्ष रिकार्ड तोड तीर्थ यात्रियों के पहुंचने से मदमहेश्वर घाटी के तीर्थाटन – पर्यटन व्यवसाय में खासा इजाफा हुआ है।
कैसे पहुंचे मदमहेश्वर धाम
ऊखीमठ : देवभूमि उत्तराखंड के प्रवेश द्वार हरिद्वार से 204 किमी बस या निजी वाहन से तय करने के बाद तहसील मुख्यालय ऊखीमठ पहुंचा जा सकता है तथा तहसील मुख्यालय से बस या निजी वाहन से 22 किमी दूरी तय करने के बाद मदमहेश्वर यात्रा के आधार शिविर रासी गाँव पहुंचा जा सकता है। रासी गाँव से 14 किमी दूरी पैदल तय करने के बाद मदमहेश्वर धाम पहुंचा जा सकता है। रासी व मदमहेश्वर धाम के अलावा पैदल मार्ग पर गौण्डार, बनातोली, खटारा ,नानौ, मौखम्बा व कूनचट्टी मे क्षमता के अनुसार तीर्थ यात्रियों को ठहरने की उचित व्यवस्था है तथा निर्धारित दरों पर हर यात्रा पड़ाव पर खाने की सुविधा हर समय उपलब्ध रहती है। राज्य योजना के अन्तर्गत अकतोली – गौण्डार मोटर मार्ग का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, आगामी यात्रा सीजन 2026 तक तीर्थ यात्रियों को गौण्डार गांव तक यातायात सुविधा मिलने की सम्भावना बनी हुई है।
मदमहेश्वर धाम महात्म्य
द्वितीय केदार मदमहेश्वर धाम मे भगवान शंकर के मध्य भाग की पूजा होने से यह धाम मदमहेश्वर धाम से विश्व विख्यात है तथा द्वितीय केदार के नाम से जाना जाता है। भगवान मदमहेश्वर को न्याय का देवता माना जाता है इसलिए मदमहेश्वर धाम में हर भक्त की मुराद पूरी होती है। लोक मान्याताओं के अनुसार हिमालय गमन के समय पाण्डवों ने लम्बा समय मद्महेश्वर धाम में व्यतीत किया तथा मद्महेश्वर धाम से नन्दी कुण्ड – पाण्डव सेरा होते हुए भू-बैकुंठ बदरीनाथ गमन किया। नगर पंचायत अध्यक्ष कुब्जा धर्म्वाण ने बताया कि मदमहेश्वर धाम अखिल कामनाओं की पूर्ति करने वाला है।
