
लक्ष्मण नेगी
ऊखीमठ : आजादी के बाद पहली बार सीमांत गांवों के ग्रामीण को संचार सुविधा मुहैया कराने के उद्देश्य से एक वर्ष पूर्व लगे संचार निगम के मोबाइल टावर शोपीस बने हुए हैं , परिणामस्वरूप सीमांत गांवों के ग्रामीण संचार युग में भी मीलों दूर ऊंची चोटियों या पेड़ की शाखाओं पर बैठकर मोबाइल नेटवर्क ढूंढने को विवश बने हुए हैं। सीमांत गांवों में संचार निगम द्वारा मोबाइल टावरों का ढांचा खडा करते वक्त सीमांत गांवो के ग्रामीणों में अपार खुशी देखने को मिली थी मगर एक वर्ष बाद भी मोबाइल टावरों की संचार सेवाएं सुचारू न होने से ग्रामीणों अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं।
सीमांत गांवों के ग्रामीण का कहना है कि चुनाव के वक्त ग्रामीणों को कोरे आश्वासन देकर खासा वोट बैंक बटोरा जाता है मगर सत्तासीन होने के बाद सीमांत गांवों के ग्रामीणों की सुध लेने वाला कोई नही है । ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा विगत वर्ष 22 सितम्बर को सीमांत क्षेत्रों में लगे मोबाइल टावरों की सेवा दो माह बाद सुचारू होने का आश्वासन दिया गया था मगर 11 माह से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी संचार निगम के मोबाइल टावर शोपीस बने हुए है।
बता दें कि वर्ष 2022 के अन्त मे तत्कालीन गढ़वाल सासंद तीरथ सिंह रावत के अथक प्रयासों से तोषी , चिलौण्ड, गौण्डार, गडगू व तुंगनाथ घाटी के विभिन्न यात्रा पड़ावों को संचार सुविधा से जोड़ने के उद्देश्य से आधा दर्जन मोबाइल टावर लगाने की स्वीकृति मिली थी तथा स्वीकृति मिलने के बाद संचार निगम ने सीमांत क्षेत्रों में मोबाइल टावर लगाने का कार्य त्वरित गति से शुरू किया था। मोबाइल टावरों का निर्माण कार्य पूरा होने के वर्षो बाद भी मोबाइल टावर शोपीस बने हुए हैं। पूर्व प्रधान नरेन्द्र पंवार ने बताया कि सीमांत क्षेत्रो में मोबाइल टावर लगने से सीमांत गांवों के ग्रामीणों में आजादी के बाद पहली बार संचार सुविधा से जुड़ने का जश्न तो था मगर मोबाइल टावरों के सो पीस बनने से सीमांत गांवों के ग्रामीणों के अरमान धरे के धरे रह गये। बदरी – केदार मन्दिर समिति पूर्व सदस्य शिव सिंह रावत का कहना है कि सीमांत क्षेत्रों में मोबाइल टावर लगने से मदमहेश्वर व तुंगनाथ धामों के यात्रा पड़ावों संचार सुविधा से जुड़कर स्थानीय तीर्थाटन, पर्यटन व्यवसाय में भारी इजाफा होने का अनुमान था मगर संचार निगम की लापरवाही से मोबाइल टावर शोपीस बने हुए हैं ।

