
लक्ष्मण नेगी
ऊखीमठ : पांडवाज ग्रुप व ग्राम पंचायत सारी के ग्रामीणों के संयुक्त तत्वावधान मे पर्यटन स्थल सारी – देवरिया ताल में आयोजित पांच दिवसीय काफल फेस्टिवल के समापन गए। इस अवसर पर अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम और काफल फेस्टिवल के समापन अवसर पर कलश संस्था के कवियों ने अपने कविताओं के माध्यम से समाज के बदले परिवेश पर गहरे व्यंग्य कसे जबकि फेस्टिवल के समापन अवसर पर पांडवाज ग्रुप के कलाकारों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही जिसका दर्शको ने देर सांय तक भरपूर लुप्त उठाया।

काफल फेस्टिवल के समापन अवसर पर विशेषज्ञों ने पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के जरिये ग्रामीणों को अनेक सुझाव दी तथा महिला मंगल दल सारी द्वारा स्टाल लगाकर देश – विदेश के पर्यटकों व सैलानियों को स्थानीय व्यंजन से रूबरू करवाया। पांच दिवसीय काफल फेस्टिवल के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने पांडवाज के कार्यक्रमों की भूरि – भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि पांडवाज ग्रुप ने केदारघाटी की लोक संस्कृति को विश्व में विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए सराहनीय पहल की है। उन्होंने कहा कि पर्यटक स्थल देवरियाताल व सारी गांव धीरे – धीरे पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान बना चुका है, इसलिए प्रति वर्ष हजारों पर्यटक व सैलानी यहां की खूबसूरती से रूबरू हो रहे हैं जिससे तीर्थाटन, पर्यटन व्यवसाय में खासा इजाफा हो रहा है।

केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने कहा के पांडवाज ग्रुप के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय काफल फेस्टिवल के आयोजन से युवाओं व ग्रामीणों में नव ऊर्जा संचार हुआ है। काफल फेस्टिवल के समापन अवसर पर प्रो 0 एस पी सती , राहुल कोटियाल, उपेन्द्र भट्ट व कैलाश नौटियाल ने ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण, संवर्धन, पालीथीन उन्मूलन व जंगली के जानवरो के आतंक से निजात दिलाने तथा ग्लोबल वार्मिंग सहित परिचर्चा के माध्यम के अनेक जानकारी दी । काफल फेस्टिवल के समापन अवसर पर कलश संस्था के कवि मुरली दीवान, जगदम्बा चमोला, उपासना सेमवाल, बीना बेजवाल, जय विशाल गढ़ देशी, तेजपाल रावत निर्मोही , ओम प्रकाश सेमवाल, वैदिका सेमवाल ने अपने कविताओं के माध्यम से समाज के बदलते परिवेश पर गहरे व्यंग्य कसे । पांडवाज के प्रभारी सलिल डोभाल ने बताया कि पांच दिवसीय काफल फेस्टिवल मे सारी, तुंगनाथ घाटी , चमोली , श्रीनगर, पौड़ी सहित विभिन्न जिलों के युवाओं काफल फेस्टिवल मे प्रतिभाग किया तथा अनेक कार्यक्रम आयोजित किये गये। इस अवसर पर पांच दिवसीय काफल फेस्टिवल में विशेष सहयोग करने वालों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।


