प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को नई दिशा, नई गति और नया गौरव प्रदान किया : पोस्ती

Team PahadRaftar

लक्ष्मण नेगी 

ऊखीमठ : बदरी – केदार मन्दिर समिति सदस्य श्रीनिवास पोस्ती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जीवन केवल एक राजनेता का नहीं, बल्कि एक साधक, एक कर्मयोगी और एक युगद्रष्टा का जीवन है। उनके जन्मदिवस पर जब देशभर से शुभकामनाएं आती हैं, तो यह केवल औपचारिक बधाई नहीं होती, बल्कि यह उस विराट पुरुषार्थ को प्रणाम होता है जिसने भारत को नई दिशा, नई गति और नया गौरव प्रदान किया। उनका जीवन दर्शन धर्मयोग और कर्मयोग का अद्भुत संगम है, जहाँ एक ओर गहरी आध्यात्मिकता है तो दूसरी ओर कठोर कर्मनिष्ठा और संकल्पशक्ति। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बचपन से ही भारत की सांस्कृतिक चेतना को अपने जीवन में आत्मसात किया।

उनका प्रारंभिक जीवन कठिनाइयों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी भी परिस्थितियों को अपने मार्ग की बाधा नहीं बनने दिया। बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव और सेवा भावना ने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया। जीवन के हर पड़ाव पर उन्होंने भारत की मूल आत्मा – सनातन संस्कृति को अपने आचरण में जिया।

धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति उनकी जो अगाध श्रद्धा है, वह उनके कार्यों और व्यवहार में स्पष्ट परिलक्षित होती है। केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण में उनका योगदान केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं था, वह श्रद्धा, संकल्प और साधना का प्रतीक था। भयंकर आपदा के बाद जिस प्रकार उन्होंने स्वयं वहां जाकर तपस्वी भाव से साधना की, वह आज भी जनमानस के हृदय में अंकित है। उन्होंने न केवल केदारनाथ की पुरानी गरिमा को लौटाया, बल्कि उसे एक वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया। कहा कि
उत्तराखंड को वे सचमुच “देवभूमि” के रूप में सम्मान देते हैं। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री  इन चारों धामों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने, वहां की यात्रा को सहज और सुरक्षित बनाने के लिए जो योजनाएं उनके नेतृत्व में बनाई गईं वे अभूतपूर्व हैं। ऑल वेदर रोड से लेकर हेलीकॉप्टर सेवा और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा हेतु डिजिटल प्रबंधन तक, उन्होंने देवभूमि को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। यह केवल विकास नहीं, यह आस्था का सम्मान है।

काशी, जिसे विश्व की सबसे प्राचीन जीवित नगरी कहा जाता है, उसके लिए उनका विशेष अनुराग आज एक युग परिवर्तन का कारण बना। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण एक ऐतिहासिक कार्य था। मंदिर तक की संकरी गलियों से मुक्त होकर अब श्रद्धालु सीधे मां गंगा के दर्शन के साथ बाबा विश्वनाथ का सान्निध्य प्राप्त करते हैं। यह केवल स्थापत्य का कार्य नहीं, यह सांस्कृतिक पुनर्जागरण का जीवंत उदाहरण है। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिकता और परंपरा साथ-साथ चल सकती हैं, यदि नेतृत्व में दृष्टि, निष्ठा और साहस हो। सनातन धर्म के प्रति उनका अडिग प्रण किसी भाषण या वाणी तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके प्रत्येक निर्णय, योजना और व्यवहार में झलकता है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वे भारत की सांस्कृतिक विरासत को जिस गर्व और आत्मविश्वास से प्रस्तुत करते हैं, उसने भारत को एक नई वैश्विक पहचान दिलाई है। योग को विश्वस्तरीय मंच पर स्थापित कराना, आयुर्वेद को पुनः महत्व दिलाना, तथा राम मंदिर के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाना — ये सभी घटनाएं भारत की सनातन चेतना के पुनरुत्थान की गवाही हैं।

कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जीवन आत्मानुशासन, सेवा और राष्ट्रप्रेम की त्रयी पर आधारित है। वे शब्दों से नहीं, कार्यों से बोलते हैं। राजनीति में रहते हुए उन्होंने आध्यात्मिक चेतना को जीवंत रखा है, और यह सिद्ध किया है कि सच्चा नेतृत्व वही होता है जो अपने राष्ट्र की आत्मा से जुड़ा हो। उन्होंने भारत को न केवल आर्थिक और सामरिक रूप से सशक्त किया है, बल्कि आत्मबल, संस्कार और संस्कृति के स्तर पर भी जाग्रत किया है।

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