
नवधान्य ने मनाया आम और मिलेट महोत्सव
देहरादून. रामगढ़ स्थित नवधान्य जैव विविधता फार्म में 12 जुलाई को आम और मिलेट महोत्सव बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया।

इस कार्यक्रम में किसानों, परिवारों, बच्चों और आम प्रेमियों ने मिलकर देशी फसलों की विविधता और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली का आनंद लिया। देशी फसलों और पेड़ों की भरपूर विविधता नवधान्य संस्था, जिसे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. वंदना शिवा ने शुरू किया था, पिछले 40 वर्षों से देशी बीजों और जैव विविधता को बचाने का काम कर रही है। देहरादून का यह फार्म 1,000 से ज्यादा फसल किस्मों और 120 देशी पेड़ प्रजातियों का घर है। इनमें 750 प्रकार के देशी चावल और 10 से ज्यादा किस्मों के आम शामिल हैं, जैसे – लंगड़ा, दशहरी, चौंसा, गुलाब जामुन, तोतापरी, फज़ली आदि।
स्वाद परंपरा और प्रकृति का संगम
महोत्सव में लोगों ने बाग की छांव में बैठकर ताजे आम खाए और 20 से ज्यादा पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया, जिनमें आम पन्ना, आम चटनी, आम लस्सी, मिलेट हलवा आदि शामिल थे। बच्चों ने आम के पेड़ों के बीच खेल-कूद कर
प्राकृतिक वातावरण का आनंद लिया।
जलवायु संकट में समाधान की ओर कदम
नवधान्य के अनुसंधान से पता चला है कि आम जैसे पेड़ों वाले खेत रासायनिक खेती की तुलना में 10 डिग्री तक ठंडे रहते हैं और 15% ज्यादा नमी बनाए रखते हैं। यह जैव विविध खेती को जलवायु परिवर्तन से निपटने का एक मजबूत
तरीका साबित करता है।
डॉ. वंदना शिवा का संदेश
डॉ. वंदना शिवा ने कहा: नवधान्य हमारी परंपरागत खाद्य संस्कृति और जैव विविधता को जीवित रखता है। हमने 750 प्रकार के चावल और 230 प्रकार के गेहूं सहित हजारों बीजों को बचाया है। आज का महोत्सव इस विविधता का जश्न
है। नवधान्य न सिर्फ खेती करता है, बल्कि ज्ञान और प्रकृति के साथ तालमेल को भी बढ़ावा देता है।
एक बीज, एक पेड़, एक साझा भोजन
यह महोत्सव केवल आम और मिलेट का उत्सव नहीं था, बल्कि यह प्रकृति से जुड़ाव, ज्ञान और भारतीय कृषि परंपरा को फिर से जीवंत करने की प्रेरणा भी बना।

