लामबगड़ : गाडू स्नान के साथ खिरों उन्याणी पूर्णमासी मेला हुआ संपन्न 

Team PahadRaftar

संजय कुंवर 

लामबगड़ : गाडू स्नान के साथ खिरों उन्याणी पूर्णमासी मेला हुआ संपन्न

ज्योतिर्मठ क्षेत्र की लामबगड़ घाटी खीरों वैली की आराध्य मां उन्याणी देवी को समर्पित खीरों पूर्णमासी मेला सम्पन्न हो गया है।टन्गवणा जागरों से गूंजी खीरों घाटी अलकनंदा घाटी के लामबगड़ क्षेत्रकी खीर गंगा के दूसरे छोर पर स्थित खूबसूरत उच्च हिमालई क्षेत्र खीरों घाटी की आराध्य देवी मां उन्याणी देवी को समर्पित प्रसिद्ध खीरों पूर्णमासी मेला आज पूर्णमासी पर्व पर भाद्रपद की पवित्र पूर्णिमासी तिथि में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ आयोजित हुआ।

इस देव उत्सव की खास विशेषता ये है की पूरे देव उत्सव में मां उन्याणी देवी के मंदिर में ढोल दमांऊ की थाप नहीं सुनाई देती है, सिर्फ पौराणिक टन्गवणा जागरों के माध्यम से देवी का आह्वाहन किया जाता है और बाद में विदा भी किया जाता है। इन्हीं देव जागरों की ही गूंज पूरे खीरों घाटी में आज के दिन सुनाई देती है, इस पूर्णमासी देव उत्सव में पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए लामबगड़ क्षेत्र की ग्राम प्रधान मीना चौहान ने कहा कि इस विषम परिस्थितियों से भरी घाटी में इस उन्यानी देवी पूर्णमासी उत्सव में सीमित संसाधनों के बलबूते और पूरी लामबगड़ वैली के साथ-साथ आप सभी के सहयोग से ही ये पूर्णमासी उत्सव सफल हो पाया है।

दरअसल लामबगड़ क्षेत्र के खीरों घाटी में हर वर्ष उन्यांणी माता मंदिर में पूर्णमासी मेला (टम्वरा जागर) का आयोजन होता है। ग्राम सभा लामबगड़ द्वारा आयोजित इस मेले में दूर–दूर से देवी भक्त पहुंचते है। बेनाकुली स्थित खीर गंगा ओर अलकनंदा नदी के पवित्र संगम से 3.5 किसी दूरी पर उच्च हिमालई क्षेत्र में खीरों वैली में माता उन्यांणी का भव्य मंदिर है जो खीर गंगा के पास स्थित है। ऐसी मान्यता है कि उन्यांणी माता के दर्शन, पूजन से भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है और इसी अटूट आस्था और श्रद्धा भाव को लेकर भक्त बड़ी तादात में हर वर्ष मेले में अपनी मनोकामना ले कर पहुंचते हैं। यहां देवी जागरों की शक्ति से ही मां उन्यानी देवी सहित सभी अन्य देवताओं का आह्वान किया जाता है और विदा भी जागरों से किया किया जाता है। मां उन्याणी सेवा समिति के तत्वाधान में आयोजित इस खीरों पूर्णमासी मेले में मां उन्याणी देवी के दर्शनों के लिए भक्तों का जन सैलाब उमड़ पड़ा, मां उन्याणी देवी मंदिर के प्रांगण में दिन भर खीरों वैली, लाम बगड़ क्षेत्र माणा,हनुमान चट्टी, बेनाकुली,पांडु नगरी की महिलाओं ने अपनी पारंपरिक परिधानो और आभूषणों के श्रंगार उन्याणी माता को समर्पित पारंपरिक टन्गवणा जागरों के साथ चोफुला,दांकुड़ी,चांचड़ी जेसे सामूहिक देव लोक गीतों से खीरों घाटी का वातावरण भक्तिमई बना दिया।

इन जागरों से पूरी उन्याणी घाटी गुंजायमान हो गई। वहीं सुबह से ही भेनाकुली से लेकर खीरों घाटी तक चारों तरफ भक्तों की भीड़ नजर आई, मां उन्याणी देवी के प्रति लोगों की अगाध श्रद्धा और आस्था ही थी की मीलों दुर्गम पहाड़ी पथरीले मार्गों से चलकर महिलाए,पुरुष,बच्चे,बुजुर्ग सभी सकुशल मां उन्याणी देवी के मंदिर तक पहुंच सके। यहां पहुंच कर सभी ने मां उन्यानी देवी के दर्शनों का पुण्य लाभ अर्जित किया और देवी मां से अपने परिवार की सुख समृद्धि की मनौती भी मांगी,मां उन्याणी देवी सेवा समिति खीरों मेला द्वारा सभी देवी भक्तों के लिए भंडारे की व्यवस्था भी की गई थी, मेले के अंतिम चरण में सांय 4बजे मां उन्याणी देवी अवतरित हुई, इसके साथ मां के अन्य देव गण दाणी देवता, लाटू देवता,भूमि छेत्र पाल देवता, घंटाकर्ण देवता के पश्वा भी अवतरित हुए। अंतिम धार्मिक प्रक्रिया के तहत मां उन्याणी देवी ने सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में पवित्र देव स्नान गाडू लिया,और दुग्ध स्नान,किया,अंत में परंपरा के अनुसार मां उन्याणी देवी के सिर पर मक्खन का लेप लगाया गया, जिसके बाद मां उन्याणी देवी ने खीरों मेले में मां के दर्शन के लिए आए सभी भक्तों को सुख समृद्धि और खुशहाली का आशीष भी दिया।

अंत में महा प्रसाद वितरण के साथ उन्याणी मेले का विधिवत समापन हुआ। लामबगड़ क्षेत्र की ग्राम प्रधान मीना चौहान ने खीरों मेले में पहुंचे सभी देवी भक्तों का आभार व्यक्त किया है, साथ उन्होंने कहा की खीरों मेला में समिति की ओर से हम सभी खीरों लाम बगड़ घाटी के ग्रामीणों ने सीमित संसाधनों के बलबूते इस उच्च हिमालई घाटी में ये देव उत्सव का आयोजन किया ये सब मां उन्याणी देवी की ही कृपा से संभव हो सका है।

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