
भव्य नंदाष्टमी उत्सव के साथ ऋतु फलार समौण देकर मां नंदा देवी को कैलास के लिए किया विदा, इस दौरान ध्याणियों की आंखें छलक उठी
संजय कुंवर
ज्योतिर्मठ क्षेत्र की आराध्य देवी मां नन्दा को समर्पित नन्दा अष्टमी उत्सव आज सम्पन्न हो गया है। पहाड़ की आराध्य ओर बेटी ध्यानी के रूप में पूजी जाने वाली मां नन्दा को कैलाश विदा करते समय भक्तों की आंखें भी नम हो गई। भीगी पलकों के साथ मां नन्दा देवी को अगले वर्ष फिर बुलावा देने के वचन के साथ कैलाश विदा कर दिया गया।

देव फुलारीयों के द्वारा ब्रह्म कमल पुष्पों की कंडियों को कैलाश से लाने के पश्चात आज छेत्र के डांडो गांव की नन्दा देवी मंदिर सहित परसारी, खीरों की उन्यानी माता मंदिर, बद्रीनाथ बामणी गांव के नन्दा देवी मंदिर में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ नन्दा अष्टमी पर्व मनाया गया। सुबह मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के पश्चात मां नंदा को स्थानीय उत्पादों ओर पारंपरिक व्यंजनों चूड़ा, अरसा, सहित ऋतु फलों की समून के रूप में भेंट की गई, बामणी गांव में युवाओं द्वारा भक्तों के लिए भंडारे का भी आयोजन किया गया,मंदिर प्रांगणों में गांव की ध्यानियों द्वारा मां नन्दा के जागरों के साथ चांचड़ी, झुमैलो,दाकुडी लोक गीतों ओर सामूहिक लोक नृत्य से माहौल नन्दा मई बना दिया। वहीं हवन पूजन के बाद मां नन्दा देवी को कैलाश विदा किया गया। इस दौरान विदाई के पल में जय मां नंदा के जयघोष गूंज उठे। वहीं ध्याणियों (विवाहित बेटियां) ने मां नंदा को श्रृंगार सामग्री भेंट कर सुख समृद्धि और खुशहाली की मनौतियां भी मांगी। मां नंदा की विदाई के दौरान भक्तों की आंखें झलक उठी।

