
ज्योतिर्मठ : हंसता हुआ कबूतर पक्षी बना बर्ड वाचरों के आकर्षण का केंद्र
पहाड़ रफ्तार
सूबे का पहला सरहदी सीमांत नगर ज्योतिर्मठ इन दिनों समर विजिटर पक्षियों के कलरव से गुलजार है। इन दिनों यहां दक्षिणी भारत के विभिन्न प्रांत पूर्वी और पश्चिमी घाट,नीलगिरी की पहाड़ियों तमिलनाडु क्षेत्र मध्य प्रदेश आदि स्थानों से बड़ी तादाद में ग्रीष्मकालीन आगंतुक पक्षियों की कई प्रजातियां पहुंची हैं। जिनमें फ्लाई कैचर परिवार से इंडियन पैराडाइज फ्लाई कैचर पक्षी,दूध राज,आसमानी नील मछरिया, एशियन कोयल,सलेटी भुजंगा,देशी कस्तूरा,चितकबरा थ्रश,पीलक पक्षी,लेसर कुकू,एमरल्ड डव, फायर टिट,ब्लू कैप्ड रॉक थ्रश, ओरियंटल ब्लू मैगपाई रोबिन के साथ साथ आजकल एक खास पक्षी लाफिंग डव यानी हंसाने वाली कबूतर/फाख्ता नगर क्षेत्र में पक्षी प्रेमियों और बर्ड वाचरों के लिए बेहद ही आर्कषण का केंद्र बने हुए है। नन्दा देवी राष्ट्रीय पार्क के बफर जोन ज्योर्तिमठ क्षेत्र में पक्षी अवलोकन के क्षेत्र में कार्य कर रहे प्रकृति पर्यटन एक्सपर्ट संजय कुंवर ने बताया कि यह हंसाने वाला कबूतर पक्षी बेहद शर्मीले स्वभाव का है जो काफी दिनों से उन्हें बर्ड वाचिंग के दौरान नरसिंह मंदिर बद्रीनाथ बाई पास रोड के आसपास एक पेड़ में पत्तों के झुरमुट की छांव में बैठा हुआ आइडेंटिफाइड हुआ है। इसके साथ ही हरा कबूतर वेज टेल्ड ग्रीन पिजन,कालहक फाख्ता,चितरोखा फाख्ता,रॉक पिजन,ओर तमिलनाडु का राज्य पक्षी एशियन एमरल्ड डव भी बर्ड वाचिंग के दौरान नगर छेत्र के विभिन्न पक्षी अवलोकन साइट पर नजर आए है,हालांकि इस पक्षी को देखने के बाद इसकी एक तस्वीर को पहले जाने माने बर्ड वाचिंग एक्सपर्ट राजेश बिष्ट को जांचने बाबत भेजी जिसके बाद उनके द्वारा ही इस बात की पुष्टि की गई कि ये पक्षी हंसाने वाला कबूतर ही है,इसी हंसाने वाले कबूतर पंछी की एक झलक नरसिंह मंदिर छेत्र के स्थानीय विजय डिमरी ने भी अपने खेतों में कुछ गतिविधि करते हुए देखी है,इस आकर्षण पक्षी के नगर क्षेत्र में दस्तक से स्थानीय प्रकृति प्रेमी और पक्षी अवलोकन के शौकीन भी काफी खुश नजर आ रहे हैं। फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क की रेंज ऑफिसर चेतना काण्डपाल ने भी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि वन विश्राम गृह के आसपास भी इन दिनों कोकिला हरियल कबूतर प्रजाति का पक्षी भी खूब दिखाई दे रहा है, समर विजिटर पक्षियों का ज्योतिर्मठ में प्रवास के लिए अच्छी तादात में आना यहां के पक्षी विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अच्छी खबर है।
दरअसल उत्तराखंड के खासकर गढ़वाल हिमालय में “हंसता हुआ कबूतर” एक बेहद लोकप्रिय पक्षी माना जाता है। जो “हंसता हुआ कबूतर” के नाम से पहचाना जाता है, ये उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य हिमालयी इलाकों के साथ साथ हिमालय के तराई, क्षेत्रों पूर्वोत्तर भारत, सहित श्रीलंका में भी पाया जाता है.यह मध्यम आकार का कबूतर है,जो गुलाबी भूरे रंग का होता है। इसके ऊपर भूरे रंग के धब्बे दिखते हैं और गर्दन के किनारे पर काले और सफेद रंग का चेकर पैच होता है। इस पक्षी का भोजन खासकर अनाज, बीज, और छोटे फल हैं. ये पंछी अक्सर खुले और अर्ध-खुले आवासों में रहते हैं, जैसे खेत, खलिहान,बगीचे, और जंगल. ये खुले में या जोड़े में छोटे समूहों में भोजन की तलाश करते हुए नजर आते हैं. आमतौर पर हंसने वाला कबूतर, को छोटा भूरा कबूतर (स्ट्रेप्टोपेलिया सेनेगलेंसिस) के रूप में जाना जाता है। वे कोलंबिडे परिवार, कोलंबिफॉर्मेस और स्पिलोपेलिया वंश के पक्षी हैं। हंसने वाले कबूतर की प्रजाति को सबसे पवित्र पक्षी माना जाता है। भारत में, यह केरल, तमिलनाडु गोवा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, कश्मीर, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, बिहार और मेघालय जैसे राज्यों में व्यापक रूप से वितरित है। हंसते हुए कबूतर मुख्य रूप से बीज और अनाज खाते हैं और कभी-कभी कीड़े मकोड़े भी खा लेते हैं। हंसते हुए कबूतरों की सभी प्रजातियों का पसंदीदा आहार सूरजमुखी के बीज होते हैं।

