
संजय कुंवर
चमोली : बदरीनाथ धाम का द्वारा आदि गुरु शंकराचार्य जी की तपस्थली ज्योतिर्मठ नरसिंह मंदिर परिसर में रंगोत्सव होली का त्योहार इस बार ऐतिहासिक मनाया गया।
होली पर आज सुबह से ही सम्पूर्ण अलकनंदा घाटी रंगोत्सव फाल्गुनी रंगों में डूबा नजर आया। नगर से लेकर पर्यटन स्थल औली तक होलियारों ने एक दूसरे को रंग लगाकर बधाई एवं शुभकामनाएं दी। भगवान नरसिंह की भूमि में पहली बार नगरवासियों ने एकजुटता के साथ होली मिलन का वृहद कार्यक्रम आयोजित किया गया। नगर की महिलाओं, युवाओं ने बड़ी संख्या में यहां पहुंच कर प्रेम, सौहार्द और आपसी भाईचारे के रंगों से सराबोर हुए।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह वही पावन स्थल है जहां भगवान विष्णु ने अपने परम भक्त प्रहलाद की रक्षा हेतु नृसिंह अवतार लेकर अत्याचारी हिरण्यकश्यप का वध किया था और युद्ध के पश्चात अपने रौद्र क्रोध को शांत करने के लिए इसी स्थान पर विराजमान हुए थे। इसी पौराणिक और विजय के प्रतीक स्थल पर स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व मनाया। नृसिंह भगवान के जयकारों और पारंपरिक होली गीतों के बीच आयोजित इस मिलन समारोह ने न केवल सामाजिक एकता का संदेश दिया, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से भी रूबरू कराया।
