
पहाड़ रफ्तार
दूधराज के बाद ब्लू रॉबिन, देशी कस्तूरा,पाइड थ्रश पक्षी भी पहुंचे ज्योतिर्मठ, स्वर्ग के पंछी “दूधराज” जिसे अंग्रेज़ी में एशियाई दिव्यलोकी कीटमार (Indian Paradise Flycatcher ) कहते हैं। इन दिनों अपने ग्रीष्मकालीन प्रवास पर ज्योतिर्मठ नगर क्षेत्र में पहुंच चुका है। जिसको लेकर प्रकृति प्रेमियों सहित स्थानीय बर्ड वाचरों और नन्दा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन ने भी खुशी जताई है।

ज्योतिर्मठ क्षेत्र में बर्ड वाचिंग और प्रकृति पर्यटन के क्षेत्र में कार्य कर रहे नेचर टूरिज्म एक्सपर्ट संजय कुंवर ने बताया कि इस बार ज्योतिर्मठ नगर क्षेत्र में अच्छी तादात में समर विजिटर पक्षियों की आमद हुई है, जो क्षेत्र की पक्षी जैव विविधता के लिए अच्छा संकेत है। उन्होंने जानकारी दी कि वो प्रत्येक दिन पक्षी अवलोकन के लिए अपने क्षेत्र के अलग-अलग ट्रेल पर सुबह निकल जाते हैं। आज सोमवार की सुबह जब वो बर्ड वाचिंग साईट से पक्षी अवलोकन करते हुए वापस लौट रहे कि यकायक उनकी नजर औली रोड पर चौड़ारी गांव के समीप दौड़िल पैदल मार्ग के सेब बागान में सुबह के नाश्ते के लिए कीटों की तलाश में एक्टिव मोड पर बैठे इस खूबसूरत और आकर्षक स्वर्ग के पंछी इंडियन पैराडाइज फ्लाई कैचर .लेकिन जो आज स्पॉटेड हुई है वो मादा इंडियन पैराडाइज फ्लाई कैचर थी जिसकी पूछ अभी ज्यादा बड़ी विकसित नहीं हुई है। जिसको एक नजर देख ऐसा लगा जैसे पूरे बर्ड वाचिंग ट्रेल की थकान मिट गई हो। इसका सीमांत नगर ज्योतिर्मठ में दिखना भी काफी खुशी की बात है. और हो भी क्यूं नहीं आखिर यहां के जंगलों और आसपास के क्षेत्र की जलवायु अब सभी पक्षियों को भाने लगी है. स्थानीय बर्ड वाचिंग एक्सपर्ट संजय कुंवर ने अपने पक्षी दर्शन के ताजा अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि ये दूधराज पक्षी मध्य प्रदेश का राजकीय पक्षी है.इस पंछी को काफी अद्भुत माना जाता है.अपनी लंबी, आकर्षक रिबन जैसी पूंछ और चटकीली आभा के कारण यह पक्षी सच में प्रकृति प्रेमियों और बर्ड वाचरों के लिए किसी दिवा स्वप्न से कम नहीं होता है.
गर्मियों के इन दिनों में जब ये दुर्लभ दूध राज पक्षी अपनी लंबी आकर्षक पूंछ फैलाकर हवा में कलाबाजी करते हुए नृत्य करते हैं, तो वनों ओर बागानों की शांति में एक अद्भुत सा आकर्षण भरा रंग भर देते हैं। यह पक्षी आकर्षक ही नहीं बल्कि हमारे ईको सिस्टम का बेहद महत्वपूर्ण प्रहरी और घटक भी है. यह कीटभक्षी पक्षी वनों में खेत खलिहानों बागानों में कीट नियंत्रण कर हमारी जैव विविधता को संतुलित बनाए रखने में अपना अहम रोल निभाता है.
अब गर्मियों के सीजन के आते ही विंटर विजिटर पक्षियों के लौटने के बाद समर विजिटर प्रवासी पक्षियों की अच्छी आमद क्षेत्र में होने लगी है।
बता दें कि यह पूरा बर्ड वाचिंग साईट NDBR के बफर जोन के अंतर्गत आता है और यहां पर इस दूधराज पक्षी को देखना काफी उत्साह की बात है. खास बात तो ये भी है कि यह पक्षी मध्य प्रदेश का राजकीय पक्षी भी है. नगर क्षेत्र के वन विश्राम गृह नन्दा देवी राष्ट्रीय पार्क इंद्रा प्वाइंट साईट,डांडो गांव,चौड़ारी,दौड़िल साईट, गल्ला कोटी लिंक रोड रवि ग्राम, खंचा जीरो बैंड ट्रैल, टीवी टावर, सुनील औली रोड की बर्ड वाचिंग साईट में आसानी से ग्रीष्मकालीन आगंतुक पक्षियों का मधुर संगीत सुबह ओर शाम खूब सुनाई दे रहा है,इन दिनों छेत्र में खेत खलिहानों, झुरमुट झाड़ियों बागानों और बांज बुरांस,पाईंन,शंकु धारी वन छेत्र में अधिकतर दक्षिणी भारत के पूर्वी पश्चिमी घाटों, नीलगिरी घाटी, से लेकर बर्मा,श्री लंका तक के इलाकों के प्रवासी समर विजिटर पक्षी नजर आ रहे हैं। जिनमें दक्षिव की नीलगिरी घाटी, पूर्वी पश्चिमी घाट क्षेत्र से समर विजिटर प्रवासी पक्षी देशी कस्तूरा,चिंतकबरा थ्रश,वर्डिटर फ्लाईकैचर,एशियन कोयल, एशी ड्रोंगो,इंडियन पैराडाइज फ्लाई कैचर पक्षी,फायर कैप्ड टिट,ब्लू कैप्ड रॉक थ्रश,सहित ओरियंटल ब्लू मैगपाई रोबिन, दयाल पक्षी,इंडियन ब्लू रोबिन, ग्रे वेगटेल,लौंग टैल श्राइक आदि प्रवासी पक्षी है जो आजकल अपने अपने विंटर विजिटर डेस्टिनेशन से प्रजनन सहित अन्य गतिविधियों के लिए इस छेत्र में पहुंचे हैं और सितंबर अक्टूबर तक ये सभी पंछी अपने-अपने शीतकालीन प्रवास स्थलों की ओर लौट जाएंगे।
इसलिए कहा जाता है स्वर्ग का पंछी दूध राज
दरअसल दूधराज पक्षी इंडियन पैरा डाइज फ्लाई कैचर के कई नाम हैं. कई जगहों पर इसे सुल्ताना बुलबुल नाम से जाना जाता है.ओर इसे स्वर्ग का पक्षी भी कहा जाता है. ये दूधराज पंछी घने जंगलों और नदियों ओर घने फल बागानों के आसपास भी रहना ज्यादा पसंद करते हैं.महत्व पूर्ण बात ये कि 4 साल की उम्र में जहां नर दूधराज पक्षी का रंग बदलकर दूधिया सफेद होने की वजह से ही इसका नाम दूधराज पड़ा. बता दें कि यह पक्षी मार्च से जुलाई के बीच नेस्टिंग करते हैं और यही उनके प्रजनन का उत्तम समय होता है. दूधराज पक्षी का पसंदीदा भोजन फल, कीड़े, पतंगे, तितलियां, मक्खियां और अन्य छोटे कीड़े मकोड़े होते हैं. बड़ी बात ये भी है कि यह स्वर्ग का पंछी हवा में ही अपने शिकार करना पसंद करते हैं.

