पहाड़ रफ्तार
ज्योर्तिमठ : नन्दा देवी बायोस्फियर रिजर्व के तत्वावधान में ईको-टूरिज्म एवं नेचर गाइड विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पार्क कार्यालय के नेचर सैंटर में कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन कृषि वन रिसर्च सेंटर एवं कृषि उद्यमिता विकास एवं ईपीएस देहरादून द्वारा किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले दिन उद्घाटन अवसर पर अपने सम्बोधन में डीएफओ नन्दा देवी आइएफएस अभिमन्यु ने कहा कि इस क्षेत्र में ईको टूरिज्म, नेचर टूरिज्म की अपार संभावनाएं मौजूद हैं और यह स्थानीय युवाओं के लिए आजीविका संवर्धन का सशक्त माध्यम बन सकता है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में पार्क प्रशासन द्वारा टूर एजेंसियों से जुड़े अधिक से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण, क्षमता विकास, प्रशिक्षण श्रृंखला तथा डिजिटल प्रचार-प्रसार के माध्यम से सशक्त करने को विभाग द्वारा ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
इस अवसर पर एसडीओ सुमन ने कहा कि हमें अपने क्षेत्र के पर्यटन स्थलों पर पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता तथा जनमानस में प्रकृति प्रेम की भावना विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। कृषिवन संस्था के सचिव केशव शर्मा ने कहा कि पारंपरिक सांस्कृतिक उत्पादों को पर्यटन से जोड़कर उनका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए, जिससे स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिल सके। संस्था के विशेषज्ञ प्रमोद कुमार चौरसिया ने बताया कि ईको-टूरिज्म एवं नेचर गाइड के क्षेत्र में संस्था कई वर्षों से कार्यरत है। उन्होंने कहा कि यह पहल पलायन की समस्या को रोकने में सहायक सिद्ध हो सकती है। युवा अपने क्षेत्र की ब्रांडिंग कर दूर-दराज के प्रकृति – प्रेमियों को आकर्षित कर सकते हैं।
इस अवसर पर नेचर गाइड एवं इकोटूरिज्म ट्रेनिंग प्रोग्राम के मास्टर ट्रेनर और नेचर एक्सपर्ट संजय कुंवर ने कहा कि पहली बार पार्क प्रशासन की इस खास पहल के चलते क्षेत्र के नेचर गाइड,टूर ऑपरेटर, स्थानीय पर्यटन कारोबारी होम स्टे संचालक एवं इकोटूरिज्म से जुड़े लोग एक साझा मंच पर एकत्रित हुए हैं। उन्होंने व्यापक इकोटूरिज्म,संभावनाओं एवं विभिन्न अवसरों पर विस्तृत चर्चा की।
इस अवसर पर एडवेंचर एसोसिएशन ज्योर्तिमठ के अध्यक्ष विवेक पंवार ने कहा कि यह वन विभाग, नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व एवं कृषिवन की सराहनीय पहल है, जिससे युवाओं को नई दिशा एवं नई उड़ान का अवसर प्राप्त हुआ है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषिवन के सलाहकार प्रकाश रतूड़ी और प्रवीण चौहान ने बताया कि इस दो दिवसीय प्रशिक्षण में व्यावहारिक जानकारी एवं विशेषज्ञों द्वारा विशेष सत्र आयोजित किए गए। कार्यक्रम में 50 से अधिक युवाओं एवं प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन शनिवार 28 फरवरी को ज्योतिर्मठ क्षेत्र के आसपास के नेचर ट्रेल सहित औली गोरसों ईको टूरिज्म रूट पर संस्था के मास्टर ट्रेनरों द्वारा स्थानीय नेचर गाइडों को बर्ड वाचिंग और नेचर वाक् का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

