
योगाहार ने पूर्ण किए चार वर्ष: ऑनलाइन उत्सव 2025 में देशभर से जुड़े 100+ प्रतिभागी, थीम: जैविक बीजों से सृजन, चेतना और समृद्धि
हरिद्वार/देहरादून
देशभर में योग, जैविक खेती और स्वास्थ्य चेतना को समर्पित योगाहार कार्यक्रम ने अपने चार सफल वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर “ऑनलाइन उत्सव 2025” का आयोजन किया गया, जिसमें भारत के विभिन्न राज्यों से 100 से अधिक योगाहारी सदस्यों ने भागीदारी की।
हरिद्वार से पवन कुमार ने कहा कि बीते चार वर्षों में योगाहार से जुड़े किसानों ने जो अनुभव साझा किए, उन्होंने अपनी जीवनशैली और कार्यों में उल्लेखनीय बदलाव लाए हैं। उन्होंने कहा कि यह योगाहार की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
मध्यप्रदेश, टीकमगढ़ से मुन्नीलाल यादव ने योगाहार की चार वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह कार्यक्रम कोरोना काल से निरंतर चल रहा है, जिसमें योग, जैविक खेती और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दिया गया है। इस मंच से अब तक 1400 से अधिक योग शिक्षक और मुख्य वक्ता जुड़ चुके हैं। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम थी: “जैविक बीजों से सृजन, चेतना और समृद्धि।
कार्यक्रम में बीज संरक्षण के विषय पर वक्ताओं ने महत्वपूर्ण विचार साझा किए। डॉ. विनोद कुमार भट्ट ने “पारम्परिक बीज: संरक्षण, संवर्धन एवं संभावनाएं” विषय पर बोलते हुए बताया कि केंद्र सरकार का सहकारिता मंत्रालय पारम्परिक बीजों के संवर्धन और वितरण के लिए किसानों को बीज सहकारिता समिति के माध्यम से सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि देशी बीजों का संरक्षण कृषि, पोषण और संस्कृति के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में “परम्परागत बीज नायक” पुस्तक का विशेष उल्लेख हुआ, जिसकी टैगलाइन है: “देसी बीज बचाओ, देसी बीज बढ़ाओ”। लेखक श्री दिनेश चन्द्र सेमवाल ने बताया कि पुस्तक में 17 किसानों की बीज संरक्षण यात्रा को रोचक कहानियों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक के संपादक मंडल में किसान, गृहिणियाँ, वैज्ञानिक (डॉ. विनोद कुमार भट्ट, श्री पवन कुमार, श्री हीरालाल कुशवाहा, डॉ रोशन लाल राउत, डॉ. डीडी शर्मा, श्री रमेश चन्द्र मेहरा एवं श्रीमती रंजना किन्हीकर) आदि शामिल हैं, जिन्होंने स्वेच्छा से अपना योगदान दिया और उन व्यक्तियों से संवाद स्थापित करने के लिए प्रयास किया, जिनके अध्ययन और अनुभव इस पुस्तक में सम्मिलित किए गए हैं। कि इस पुस्तक में उल्लेखित व्यक्ति/किसान योगाहार परिवार के सदस्य हैं और उन्होंने अपने अनुभव ऑनलाइन सत्रों के दौरान साझा किए हैं।
इसके साथ ही डॉ. कुसुम भारद्वाज द्वारा लिखित पुस्तक “संवेदना से संकल्प: भारतीय चिकित्सा के नायक” का भी परिचय दिया गया, जिसमें होम्योपैथी, आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और रसाहार जैसे पद्धतियों में कार्यरत प्रेरक चिकित्सकों की जीवनी प्रस्तुत की गई है।
पुणे, महाराष्ट्र से सुजीत चक्रवर्ती ने “जैविक बीज सीढ़ी” नामक शैक्षणिक खेल की जानकारी दी, जो बच्चों एवं किसानों में जैविक खेती के प्रति रुचि और समझ विकसित करेगा। उन्होंने कहा कि यह खेल चार्ट जैविक कृषि प्रशिक्षण के साथ ही कृषि विज्ञानं के विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगा. कार्यक्रम का शुभारंभ महाराष्ट्र की श्रीमती रंजना किन्हीकर ने योगाहार की विगत वर्षों की प्रमुख झलकियों के वीडियो प्रस्तुतीकरण के माध्यम से किया।
“पद्मश्री हरमन शर्मा, डॉ. डी. डी. शर्मा, श्रीमती शुभद्र कुंवर (हिमाचल प्रदेश), पद्मश्री चिन्ताला वेंकट रेड्डी (तेलंगाना), श्रीमती श्वेता बधानी (उत्तरकाशी), श्रीमती जुली अग्रवाल (असम), सी. एम. राय और श्री प्रकाश रघुवंशी (उत्तर प्रदेश), रवि आदित्य (बिहार) तथा भुवनेश्वर राय (झारखंड) सहित सभी प्रतिभागी सदस्यों ने अपने विचार साझा किए और इस अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।”
कार्यक्रम का संचालन श्री मुन्नीलाल यादव ने किया एवं समापन पर धन्यवाद ज्ञापन श्री शरद वर्मा ने किया।

