गोपेश्वर : चमोली जिले में मौन पालन बना आजीविका का आधार

Team PahadRaftar

चमोली में मौन पालन काश्तकारों की आर्थिकी का बन रहा मजबूत आधार, जनपद में 505 काश्तकार मौन पालन कर अपनी आर्थिकी को कर रहे हैं सुदृढ़, राज्य सरकार 40 फीसदी राजकीय सहायता पर काश्तकारों को उपलब्ध करवा रही मौन कॉलोनी (बॉक्स)

चमोली : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में मौन पालन काश्तकारों की आर्थिकी का मजबूत आधार बनने लगा है। मौन पालन कर काश्तकार कम लागत में अपनी आय बढ़ा रहे हैं। चमोली जिले में सरकार की ओर से संचालित मौन पालन योजना के तहत 505 काश्तकार मधुमक्खी पालन कर शहद का उत्पादन कर रहे हैं।

उद्यान विभाग के पीडीओ चमोली योगेश भट्ट ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से काश्तकारों की आय बढ़ाने की मंशा से मौन पालन योजना का संचालन किया जा रहा है। जिसके तहत सरकार की ओर से 40 प्रतिशत राजकीय सहायता पर मौन कॉलोनी (बॉक्स) उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही योजना में आवेदन करने वाले काश्तकारों को मधुमक्खी पालन का सात दिवसीय प्रशिक्षण देने के साथ ही 1050 रुपए की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है। बताया कि उद्यान विभाग की ओर से चमोली जनपद के 505 काश्तकारों के साथ मौन पालन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि काश्तकार मधुमक्खी पालन कर वर्तमान में करीब 249.48 कुंतल शहद का उत्पादन कर रहे हैं। जिसका विपणन काश्तकार 1200 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से विपणन कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं।

क्या कहते हैं काश्तकार

केस-1 गोपेश्वर निवासी रोहितास पुरोहित का कहना है कि वर्ष 2023 में एक मौन कॉलोनी (बॉक्स) के साथ काम शुरु किया था। जिसके बाद उद्यान विभाग की ओर से मिले प्रशिक्षण के साथ वर्तमान में 25 मौन कॉलोनियों (बॉक्स) के साथ काम कर रहा हूं। बताया कि मौन पालन कम मेहनत में बेहतर आय देने वाला कार्य है। साथ ही इसे व्यवसायिक स्तर पर करने पर विपणन की भी कोई परेशानी नहीं है। कहा कि खुले बाजार में शहद 1200 रुपए प्रति किलोग्राम की कीमत पर आसानी से बिक रहा है।

केस-2
बैरागना गांव निवासी वीरेंद्र सिंह और टंगसा गांव निवासी प्रमेंद्र सिंह का कहना है कि मधुमक्खी पालन के लिए प्रशिक्षण के बाद स्वयं देखरेख कर अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। जिसे युवा घर पर ही अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं।

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