
संजय कुंवर
चमोली : चमोली जिले के जोशीमठ ब्लॉक में स्थित विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी कल एक जून को पर्यटकों के लिए खोल दी जाएगी, 62 प्रकृति प्रेमियों ने किया ऑनलाइन आवेदन।
उत्तराखंड के उच्च हिमालई भ्यूंडार वैली में स्थित यूनेस्को की विश्व प्राकृतिक धरोहर फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क इस ग्रीष्मकाल के लिए पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए कल रविवार 1जून से खोल दी जाएगी। वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क प्रशासन ने घाटी में इस साल के नए सीजन की शुरुआत होने से पहले सभी तैयारियां पूर्ण कर ली हैं। जैव विविधता से भरी ब्रिटिश पर्वतारोही और वनस्पति विज्ञानी फ्रैंक स्मिथ की खोजी इस घाटी में प्रकृति प्रेमियों को हिमालई फ्लोरा फ्यूना से लेकर प्राकृतिक नजारों का दीदार बेहद नजदीक से होता है। अपने प्राकृतिक आवास में ही उगने वाली दुर्लभ अल्पाइन पुष्पों की सैकड़ों प्रजातियों के साथ साथ वेश कीमती जड़ी बूटियों के लिए पहचानी जाने वाली इस वैली के प्रवेश द्वार कल रविवार को प्रातः काल द्वार पूजन के बाद खुलेंगे। वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क की वन क्षेत्र अधिकारी चेतना काण्डपाल की अगुवाई में इस नंदन कानन को आम पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए खोले जाने की सभी औपचारिक तैयारिया पार्क प्रशासन ने पूरी कर ली है। इस बार इस विश्व धरोहर फूलों की घाटी आने वाले पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क परमिट चार्ज भी पार्क प्रशासन द्वारा आफ लाईन के साथ साथ ऑनलाइन भी कर दिया है। ऐसे में पर्यटक वैली आने के लिए एडवांस में भी वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क की ऑफिसियल वेब साईट पर जाकर घाटी में भ्रमण करने का ऑनलाइन प्रवेश परमिट हासिल कर सकते है जो भारतीय पर्यटकों के लिए 200रुपया प्रति पर्यटक और विदेशी पर्यटकों के लिए 800 रुपया प्रति पर्यटक की दर से शुल्क लिया जा रहा है। पार्क की रेंज ऑफिसर चेतना काण्डपाल ने बताया कि कल सुबह ठीक 7 बजे घाटी के प्रवेश द्वार औपचारिक द्वार पूजन के बाद आम पर्यटकों के लिए खोले जाएंगे। वहीं जून माह के लिए 15 जून से 30 जून के बीच की तारीख में करीब 62 पर्यटकों ने ऑनलाइन परमिट के लिए आवेदन किया है। पार्क प्रशासन घाटी में आने वाले सभी पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। वैली में वन्य जीव प्राणियों सहित सभी पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर भी पार्क प्रशासन पूरी तरह से संजीदा है उन्होंने पार्क की सैर करने आने वाले पर्यटकों से अपील की है कि घाटी की प्राकृतिक सुन्दरता और वन्य जीवन के साथ प्रकृति के साथ किसी भी तरह की छेड़ छाड़ न करें।

