चमोली : फूलों की घाटी यूनेस्को धरोहर की 20वीं वर्षगांठ हर्षोल्लास से मनाया

Team PahadRaftar

संजय कुंवर 

फूलों की घाटी : यूनेस्को वर्ल्ड नेचुरल हैरिटेज दर्जा मिलने के साथ संरक्षण और प्राकृतिक सौंदर्य के दो दशकों का मनाया जश्न।

नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व के कोर जोन के अंतर्गत आने वाली उच्च हिमालई भ्यूंडार घाटी में मौजूद प्राकृतिक वियावान फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज साईट का दर्जा प्राप्त होने की अपनी 20 वीं वर्षगांठ मना रहा हैं। वर्ष 2005 में असीमित जैव विविधता और अल्पाइन हिमालई पुष्पों की विविधता के साथ साथ दुर्लभ वन्य जीवन के लिए यह प्राकृतिक धरोहर पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं।

सन 1932 में अपने कॉमेट पर्वतारोहण अभियान के दौरान ब्रिटिश पर्वतारोही और वनस्पति विज्ञानी फ्रैंक स्मिथ द्वारा खोजी इस खूबसूरत वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क को अंतरराष्ट्रीय पहचान देने के लिए यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था और इस साल वर्ष 2025 में वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क की विश्व धरोहर स्थल के रूप में यूनेस्को से मान्यता के 20 साल पूरे हो रहे हैं।इस दो दशक के सेलिब्रेशन हेतु नन्दा देवी बायोस्फियर रिजर्व प्रशासन और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान विभाग अपने स्तर से फूलों की घाटी विश्व प्राकृतिक धरोहर के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिलने के 20 वर्ष होने पर कई कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। प्रभागीय वनाधिकारी नन्दा देवी राष्ट्रीय पार्क तरुण एस के दिशा निर्देशन में फूलों की घाटी के प्रवेश द्वार से लेकर घाटी के भीतर पर्यटकों को पार्क कर्मियों द्वारा वैली के बारे में वृहद जानकारी दी जा रही है और प्रकृति प्रेमी पर्यटकों को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल बनने तक के बारे में भी बताया जा रहा है। घाटी में देशी – विदेशी पर्यटक जहां पार्क कर्मियों द्वारा दी गई जानकारी और मदद से काफी खुश होकर वैली प्रवेश द्वार पर खूब सेल्फी और ग्रुप फोटो लेते नजर आ रहे हैं। वहीं ज्योतिर्मठ क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के जागरूक प्रकृति प्रेमी छात्र – छात्राओं के लिए पार्क प्रशासन वैली से संबंधित जागरूकता अभियान,प्रचार प्रसार,जैव विविधता और दुर्लभ फ्लोरा फ्यूना को लेकर चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन कर रहा है।

इस अवसर पर नन्दा देवी राष्ट्रीय पार्क ज्योतिर्मठ के नेचर सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में विशेष रूप से फूलों की घाटी पर कई दशकों से अपने छाया चित्रों से शोध करने वाले भ्यूंडार घाटी के ही प्रकृति प्रेमी अंत राष्ट्रीय स्तर के छायाकार,भरत सिंह चौहान, प्रताप चौहान सहित ईको विकास समिति भ्यूंडार घांघरिया के अध्यक्ष प्रवेंद्र सिंह चौहान ने स्कूली बच्चों को फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान के शुरुआती दिनों से लेकर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिलने तक के इतिहास को अपने अनुभवों के रूप में साझा किया, फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क की वन क्षेत्र अधिकारी चेतना काण्डपाल ने बताया कि विभाग द्वारा इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों से आए प्रकृति प्रेमी विद्यार्थियों के लिए अपनी विश्व प्राकृतिक धरोहर वैली ऑफ फ्लावर्स के प्रति जिज्ञासा बढ़ाने और उनके मनोभाव को परखने के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें बेहतर चित्रकला बनाने वाले बच्चों को पुरस्कृत भी किया गया है।

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