
बदरीनाथ : जानि शरद रितु खंजन आए, पाई समय बिमी सुकृत सुहाए। बाल्टिक देश लातविया के राष्ट्रीय पक्षी सफेद खंजन की दस्तक से पक्षी प्रेमी उत्साहित
संजय कुंवर, बदरीनाथ धाम
भू-बैकुंठ नगरी श्री बदरीनाथ धाम से लेकर सूबे के सबसे ऊंचे मोटरेबल रोड पर स्थित 18 हजार फीट से अधिक ऊंचाई वाले देव ताल माणा पास दर्रे तक इन दिनों शरद ऋतु के आगंतुक पंछियों की विभिन्न प्रकार की दुर्लभ और आकर्षक प्रजातियों की आवाजाही बढ़ गई है। शरद ऋतु की आहट के चलते इन क्षेत्रों में मध्य एशियाई देशों से लेकर बाल्टिक क्षेत्र के प्रवासी पक्षियों की चहल कदमी नजर आ रही है।

बदरीनाथ धाम में जहां इन दिनों बद्रीश झील,शेष नेत्र क्षेत्र, सहित अन्य इलाकों में बड़ी संख्या में मोटासिलिडेई परिवार के वाइट वैगटेल पक्षियों के झुंड और एनिटिडेई परिवार के खूबसूरत जलीय पक्षी गारगने बत्तख के जोड़े सहित देव ताल सरोवर में खूबसूरत प्रवासी जलीय पक्षी का जोड़ा रडी शैल डक आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। बद्रीश झील में सुबह और शाम बड़ी संख्या में वाइट वेग टेल पक्षियों की आमद नजर आ रही है, जो बदरी पुरी आने वाले श्रद्धालुओं के साथ साथ बर्ड वाचिंग,पक्षी अवलोकन कर्ताओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। क्षेत्र के नेचर एक्सपर्ट और बर्ड वाचिंग के क्षेत्र में कार्य कर रहे प्रकृति प्रेमी संजय कुंवर ने बताया कि ग्रीष्मकालीन आगंतुक पंछियों के अपने मूल निवास की और वापस लौटने के बाद अब शरद ऋतु की दस्तक शुरू होने पर बदरी पुरी और आसपास के क्षेत्रों में विजिटर प्रवासी पक्षियों की आमद होने लगी है। बदरीनाथ धाम में जहां बद्रीश झील सहित आसपास के जलाशयों,पोखरों, नदी किनारों धारा के नज़दीक शरद कालीन प्रवासी पक्षी खासकर वाइट वैग टेल, और वाइट ब्रॉड वैग टेल के झुंड अठखेलियां करते नजर आ रहे हैं, ये वाइट वैग टेल पक्षी जिसे पाइड वेग टेल, “सफेद खंजन”पक्षी भी कहते हैं काले और सफेद मिक्स रंग के पंछी है। इन पक्षियों के चोडे माथे और काली पीठ और पूछ को बार बार ऊपर नीचे हिलाने की आदत ही आसानी से इनकी पहचान कराती है, ये खास पक्षी अहम इसलिए भी बन जाते है क्योंकि इस पक्षी को यूरोपीय बाल्टिक देश लातविया के राष्ट्रीय पक्षी का दर्जा प्राप्त है, जो पूरे शरद ऋतु में भारत के आधे क्षेत्र में प्रवास करते हैं और समर सीजन में ये पक्षी मध्य एशिया में साइबेरिया तक प्रवास करते हैं। इन खूबसूरत पक्षियों का जिक्र रामायण में गोस्वामी तुलसी दास जी ने राम चरित मानस के किष्किन्धा काण्ड में रचित शरद ऋतु को लेकर इन पंक्तियों में किया है।
जानि सरद रितु खंजन आए, पाई समय बिमी सुकृत सुहाए। दरअसल इस तथ्य में गोस्वामी तुलसी दास जी भी साफ कहते नजर आ रहे हैं कि शरद ऋतु में खंजन पक्षी आए, क्यूंकि ये सब हमारे दीर्घ अवधि में किए गए पुण्य सत्कर्मों का ही फल है। उपरोक्त पंक्तियों का भाव सफेद खंजन पक्षी से होना लाजिमी होगा क्योंकि इस पक्षी के व्यवहार के अवलोकन के बाद ही गोस्वामी जी ने इन पंक्तियों को उकेरा होगा अर्थात आप खुद समझ सकते हैं कि इस पक्षी की कितनी अहमियत होगी। ये ज्यादा तर नम भूमि पर कीड़े मकोड़ों को चुगते हैं ओर उन्हें पकड़ने के लिए तालाब, पोखरों में हवा में कला बाजी खाते कीड़ों पर झपट्टा मारते हुए एक विशेष आवाज के साथ नजर आ जाते हैं। 800 मीटर से 4500मीटर की ऊंचाई तक आसानी से नजर आने वाले ये पक्षी इन क्षेत्रों में विंटर विजिटर के रूप में ठंड की दस्तक के शुरू होते ही नजर आ जाते है। बद्रीश झील में गारगने बत्तख जैसे जलीय पक्षी का जोड़ा भी पक्षी अवलोकन कर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना है,तो उत्तराखंड के उच्च हिमालई देवताल सरोवर में भी रडी शैल डक जैसे शीतकालीन आगंतुक पक्षी का जोड़ा भी पक्षी प्रेमियों के लिए किसी उपहार से कम नहीं है। नेचर एक्सपर्ट संजय कुंवर आगे बताते है कि रडी शैल डक के जोड़ों को पिछले माह ही नन्दा देवी राष्ट्रीय पार्क की रेंज ऑफिसर चेतना काण्डपाल ने भी देवताल माणा पास रूटीन वाइल्ड लाइफ गश्त टीम विजिट के दौरान अपने कैमरे में कैद किया था,जो किस्मत से उन्हें भी माना पास देवताल MTB चेलेंज के दौरान बेनाकुलर की मदद से इस खूबसूरत बत्तख युगल के दर्शन हो गए। वहीं लाताविया देश के राष्ट्रीय पक्षी को उन्होंने बदरीनाथ धाम में बर्ड वाचिंग के दौड़ना बद्रीश झील के समीप अवलोकन किया जो वहां पर अच्छी तादाद में नजर आए हैं जो बर्ड वाचिंग के लिए बदरीनाथ धाम आने वाले पक्षी प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है।

