बसन्त नवरात्रि : सिद्धपीठ कालीमठ में तैयारियां पूरी

Team PahadRaftar

बसन्त नवरात्रि : सिद्धपीठ कालीमठ में तैयारियां पूरी

पांच कुन्तल फूलों से सजा मंदिर, नौ दिनों तक विशेष पूजा-अनुष्ठान

 लक्ष्मण नेगी 

ऊखीमठ : सिद्धपीठ कालीमठ में बसन्त नवरात्रों को लेकर सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। गुरुवार से विधिवत पूजा-अर्चना के साथ नौ दिवसीय नवरात्र महोत्सव का शुभारंभ होगा। मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया है और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

  सिद्धपीठ कालीमठ मंदिर 

नवरात्रों के दौरान मां काली, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। मुख्य मंदिर सहित पूरे परिसर को विभिन्न प्रजातियों के लगभग पांच कुन्तल फूलों से सजाया गया है। पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और साफ-सफाई के विशेष प्रबंध किए गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

कालीमठ की धार्मिक महत्ता

कालीमठ उत्तराखंड के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक मान्यता है कि यहीं मां काली ने रक्तबीज नामक असुर का संहार किया था। इस तीर्थ की विशेषता यह है कि यहां देवी की प्रतिमा के स्थान पर पवित्र कुंड की पूजा की जाती है, जो इसे अन्य शक्तिपीठों से अलग पहचान देता है।
केदारनाथ धाम के मार्ग पर स्थित होने के कारण भी इस स्थान का विशेष महत्व है और श्रद्धालु यात्रा के दौरान यहां दर्शन कर अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं।

विशेष अनुष्ठान और आयोजन

बसन्त नवरात्रों के दौरान मंदिर में दुर्गा सप्तशती पाठ, हवन-यज्ञ और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा। प्रत्येक दिन देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होगी, जिससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण बना रहेगा।
बद्री केदार मंदिर समिति, स्थानीय ग्रामीणों और व्यापारियों में भी पर्व को लेकर खासा उत्साह है।

श्रद्धालुओं में उत्साह

हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मंदिर प्रबंधन ने व्यवस्थाओं को पूरी तरह दुरुस्त कर लिया है।
पुजारी पंडित दिनेश चन्द्र गौड़ के अनुसार, कालीमठ में नवरात्रों के दौरान आस्था, भक्ति और साधना का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। वहीं मंदिर प्रबंधक प्रकाश पुरोहित ने बताया कि स्थानीय सहयोग से मंदिर को भव्य रूप दिया गया है और श्रद्धालुओं की आमद शुरू होते ही कालीमठ घाटी में रौनक लौट आई है।

बसन्त नवरात्रों के इस पावन अवसर पर कालीमठ एक बार फिर श्रद्धा, शक्ति और साधना का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है।

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